दिल्ली जल बोर्ड में बड़ा घोटाला आया सामने, एंटी करप्शन ब्रांच ने FIR की दर्ज

DELHI: दिल्ली में आबकारी घोटाले के बाद एक और घोटाला चुनाव के दौरान जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, इस बार दिल्ली जल बोर्ड में करीब 20 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। दिल्ली के LG के आदेश के बाद एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच को मिली शिकायत के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने कॉर्पोरेशन बैंक को अपने उपभोक्ताओं के बिल कलेक्शन का जिम्मा बातया है। जिसके लिए बैंक से साल 2012 में 3 साल के लिए एग्रीमेंट किया गया। बाद में इसे साल 2016, फिर 2017 और 2019 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

उपभोक्ताओं के केश और चेक के लिए दिल्ली जल बोर्ड की ही स्थानीय दफ्तरों में ई-क्योस्क मशीनें लगाई गई ताकि दिल्ली जल बोर्ड के उपभोक्ता अपने-अपने पानी के बिलों का भुगतान चेक और कैश के माध्यम से ई-क्योस्क मशीन में जमा करा सकें।

जल बोर्ड के अकाउंट में नहीं किया पैसा ट्रांसफर

सूत्रों के अनुसार कॉरपोरेशन बैंक ने कैश और चेक कलेक्शन की जिम्मेदारी M/s Freshpay IT Solution Pvt Ltd को सौंप दी गई है। जिसे इस पैसे को सीधा दिल्ली जल बोर्ड के एकाउंट में जमा कराना था। लेकिन  M/s Freshpay IT Solution Pvt Ltd ने ई क्योस्क मशीन से चेक और कैश कलेक्ट कर फेडरल बैंक के खाते में जमा कराए। एसीबी (ACB) सूत्रों के मुताबिक फ़ेडरल बैंक के जिस खाते में M/s Freshpay IT Solution Pvt Ltd ने पैसा जमा कराया वह बैंक खाता M/s Aurrum E-Payment Pvt Ltd के नाम पर था।

एसीबी सूत्रों के मुताबिक बाद में फेडरल बैंक के जिस खाते में पैसा जमा कराया गया था उस खाते से RTGS के जरिए अलग-अलग तारीखों पर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन ट्रांसफर किया गया पैसा जल बोर्ड के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया गया बल्कि कहीं और ट्रांसफर किया गया।

जल बोर्ड को 2019 में लग गया था घोटाले का पता

सूत्रों के अनुसार साल 2019 में इस फर्जीवाड़े की जानकारी दिल्ली जल बोर्ड को पता चल गई थी लेकिन बावजूद दिल्ली जल बोर्ड ने अपना पैसा रिकवर करने के बजाए कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किया बल्कि चेक और कैश कलेक्शन के लिए दी जाने वाली फीस ₹5 प्रति बिल की जगह बढ़ाकर ₹6 प्रति बिल कर दी।

LG ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

इस पूरे मामले में  दिल्ली के उपराज्यपाल ने चीफ सेक्रेटरी को आदेश दिया था कि दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों, बैंक अथॉरिटी और प्राइवेट कंपनी के खिलाफ एफआईआर (FIR दर्ज कराई जाए और दिल्ली जल बोर्ड की बकाया राशि को जल्द से जल्द रिकवर किया जाए। इसके साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट भी 15 दिन में मांगी है।