प्रधानमंत्री क्यों नही फहराते गणतंत्र दिवस पर झंडा?

भारत को आज़ाद हुए 75 वर्ष हो चुके है. हर साल राष्ट्रिय त्यौहार के तौर पर स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस मनाया जाता है. ये त्यौहार भारत के गौरव और शान का प्रतीक है. हर साल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस (आज़ादी के दिन) प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फेहरा कर देश की जनता को संबोधित करते है. मगर 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन प्रधानमंत्री राष्ट्रिय ध्वज तिरंगा नहीं फहराते बल्कि उनकी जगह देश के राष्ट्रपति झंडा फहराते है. आखिर ऐसा क्यों है? ऐसा आपके मन में भी ख्याल आता होगा की प्रधानमंत्री की जगह राष्ट्रपति ही झंडा क्यों फहराते है? इसे जानने के लिए हमारी इस खबर को पूरा पढ़े. भारत इस बार अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. 26 जनवरी 1950 के दिन भारत का संविधान लागू हुआ था. इस दिन राजधानी दिल्ली में एक विशाल परेड आयोजित होती है और संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं.

15 अगस्त 1947 को जब देश आज़ाद हुआ तब संविधान न होने के कारण भारत के प्रमुख मुखिया प्रधानमंत्री ही थे. इस दिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से पहली बार झंडा फहराया था. इसके बाद से हमेशा 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फेहराते हैं. वहीं जब 26 जनवरी 1950 को देश में सविधान लागु हुआ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति बन चुके थे. राष्ट्रपति को देश का प्रथम नागरिक माना जाता है. यही कारण है कि तब से लेकर अब तक 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति तिरंगा फेहराते हैं.

यही कारण है की गणतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति व स्वतन्त्रता दिवस पर प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते है. भारत में इन्हीं 26 जनवरी और 15 अगस्त इन्हीं दो खास दिवसों पर तिरंगा फहराया जाता है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता. इसे ध्वजारोहण कहते हैं. वहीं, गणतंत्र दिवस के दिन झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है. संविधान में इसे झंडा फहराना कहते हैं.