वनरक्षियों को भनक तक नहीं लगी, पर्यावरण दिवस के दिन ही टांगरसाई में काट दिए गए जामुन के 350 पेड़

जहा विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पूरी दुनिया में पौधारोपण अभियान चला रहा था वही झारखण्ड के पोटका के टांगरसाई व सानग्राम के बीच गुडरा नदी के किनारे स्थित करीब 350 जामुन के वृक्ष काटे गए। गुडरा नदी के किनारे करीब 500 मीटर की दूरी में काफी संख्या में जामुन के वृक्ष लगाए गए थे। अभी भी आस-पास की भूमि पर जामुन व अन्य वृक्ष काफी संख्या में है। ग्रामीणों ने जिन पेड़ों को काटा है वह काफी बड़े थे।गौरतलब है की जामुन के ३५० पेड़ काट दिए गए और इन सब की भनक वन विभाग को बिलकुल भी नहीं लगी। पेड़ो की कतई के बाद लकड़ी भी गायब कर दी गयी है। जब वन विभाग को इसकी जानकारी हुई तो लकड़ी जब्त करने के लिए आस-पास के गांवों में छापामारी कर रही है।

वृक्ष काटे जाने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को सोमवार को जानकारी तब मिली जब ग्रामीणों ने पोटका के सीओ इम्तियाज अहमद को इसकी सूचना दी। इतनी संख्या में पेड़ों के काटे जाने के बाद आस-पास के गांव के लोग आक्रोशित है। वे लोग दोषियों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। शनिवार रात से रविवार शाम तक सभी वृक्षों को काट कर उसका लकड़ी भी गायब कर दिया, लेकिन इलाके में तैनात वनरक्षियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

रैयती भूमि पर लगे थे वृक्ष

आप को बता दे की जो पेड़ कटे गए है वे सभी रैयती भूमि पर लगे थे। गौरतलब है की रैयतदार वृक्ष की लकड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के लिए वन विभाग ट्रांजिट परमिट जारी करता है लेकिन इस मामले में वन विभाग ने कोई परमिट नहीं जारी किया है। अब वन विभाग की टीम लकड़ी जब्त करने के लिए छापेमारी कर रही है और साथ साथ यह जानने का प्रयास कर रहा है की आखिरकार इतने सारे पेड़ो को क्यों और किसलिए कटा गया है।

कार्रवाई की जा रही है

वन विभाग अपने स्तर से कार्रवाई कर रहा है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है की भूमि गैरमजरूआ है अथवा रैयती। भूमि का नेचर क्या है? इसकी जांच कराई जा रही है। जामुन के पेड़ो की कतई के बाद अब वन विभाग इस मामले की तहकीकात कर रहा है की आखिरकार इतने सारे पेड़ कब और कैसे कटे गए है।