आखिर किसान आन्दोलन को हाईजैक करने की कौन कर रहा है कोशिश? पढ़िए पूरी खबर

किसान आन्दोलन के बीच में कुछ लोग ऐसे भी है जो जमकर विवादित बयान दे रहे हैं…अपनी छवि चमकाने के लिए.. वरना अपने हक़ के लिए लड़ रहे किसानों को कोई आतंकी क्यों कहता? किसानों को कोई खालिस्तानी क्यों कहता? किसानों को टुकड़े टुकड़े गैंग का हिस्स्सा क्यों कहता? क्यों कोई किसान आन्दोलन को शाहीनबाग़ 2 कहता?
आन्दोलन कर रहे किसानों को कहीं ना कहीं कुछ लोग अपने फायदे का मौका देख रहे हैं.. इसमें देश से लेकर विदेशी लोग शामिल है.. आखिर कनाडा के प्रधानमंत्री को भारतीय किसानों के साथ इतनी हमदर्दी क्यों है? भारत के विरोध के बाद भी जस्टिन टूडो आख़िरकार भारत के आंतरिक मसले किसान आन्दोलन पर बयानबाजी क्यों कर रहे हैं? इन सबके पीछे वजहें हैं..
लेकिन सबसे पहले बात करते हैं योगराज सिंह की… युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पहुंचे थे किसानों के आन्दोलन का समर्थन करने लेकिन यहाँ उन्होंने ऐसी बात कर दी जिससे उनके गिरफ्तारी की मांग उठने लगी.. इतना ही नही उनपर तो ये भी आरोप लगाए जाने लगे है कि वे अब दो धर्मों के बीच आग लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं… आखिर योगराज सिंह ने ऐसा क्या कह दिया..आइये इसी पर एक नजर डालते है..


योगराज सिंह का भाषण सोशल मीडिया में वायरल हो गया, जिसमें वे हिन्दू महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं। योगराज सिंह ने आरोप लगाया कि ‘गद्दार’ हिन्दुओं ने 100 साल मुगलों की गुलामी की।

योगराज सिंह ने कहा, “इनकी औरतें टके-टके के भाव बिकी थीं। हमने ही इनकी औरतों को बचाया।” योगराज सिंह ने वहाँ उपस्थित प्रदर्शनकारियों को पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काते हुए कहा कि वो गुजरातियों पर कभी भी भरोसा नहीं करें। उन्होंने कहा कि गुजराती अपनी माँ-बहनों की कसम खा कर पलट जाते हैं। योगराज सिंह ने दावा किया कि सिख गुरुओं ने हिन्दुओं को बचाया।

अब किसान आन्दोलन से इस बयानबाजी का  क्या लेना देना है.. आप खुद समझिये लेकिन बात यही खत्म नही हो जाती है एक वेवसाईट में छपी खबर के मुताबिक़ योगराज सिंह ने कहा कि मोदी-शाह ‘अपने दोस्त’ अम्बानी-अडानी को पंजाब लाकर दिखाएँ, फिर हम देखेंगे कि वो कैसे वापस जाते हैं? उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनके बीच से ‘एक और जरनैल सिंह भिंडरवाला’ को पैदा करने के लिए कहा।

इसी के बाद से योगराज सिंह को गिरफ्तार किये जाने कि मांग उठने लगी…लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन तूडो आख़िरकार किसान आदोलन पर इतनी बयान बाजी क्यों कर रहे है…

भारत के चल रहे किसान प्रदर्शन पर कनाडा के प्रधानमंत्री के कई बयान सामने आ चुके है.. भारत ने इस पर आपत्ति भी जताई है ये कहते हुए कि ये भारत के आंतिक मामलों में दखल देना है. लेकिन इसके बावजूद भी जस्टिन तूडो क्यों नही मान रहे है..

कहा जा रहा है कि इसके पीछे भी राजनीति है.. इसको भी समझते है…  दरअसल किसान आन्दोलन में पंजाब का किसान मतलब सिख समुदाय एक अहम् भूमिका निभा रहा है. मुख्यरूप से पंजाब के किसान अधिक दिखाई दे रहे हैं.. और कनाडा में एक मिनी पंजाब भी है.. मतलब पंजाब की एक बड़ी आबादी कनाडा में रहती है.. जिनका वहां की राजनीति में भी अच्छा खासा दबदबा है क्योंकि वे वहां के नागरिक हो गये है और अपने वोटिंग का इस्तेमाल करते है पर वे मुख्यरूप से भारतीय ही हैं. कनाडा में सिख आबादी पाँच लाख के क़रीब है. भारत और कनाडा के रिश्तों में सिख अलगाववाद या खालिस्तान एक अहम मुद्दा रहा है. कनाडा में खालिस्तान विद्रोही ग्रुप सक्रिय रहा है और जस्टिन ट्रूडो पर वैसे समूहों से सहानुभूति रखने के आरोप लगते हैं.

भारत में चल रहे किसान आन्दोलन में खालिस्तान समर्थक नारे और पोस्टर दिखाई दिये… इसके बाद न्यूयॉर्क में भी कुछ लोगों ने प्रदर्शन किया वहां भी वहीँ बातें देखने को मिली..लगभग वैसे ही नारे देखने को मिले जो भारत में चल रहे किसान आन्दोलन में कुछ जगहों से खालिस्तान समर्थकों के थे.. तो क्या अब किसान आन्दोलन का कुछ लोग फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं? क्या कुछ किसानों के बीच खुद को सबसे बड़ा शुभचिंतक बताकर उनके अंदर द्वेष की भावना पैदा कर रहे हैं? क्या किसानों के आन्दोलन को आधार बनाकर कुछ लोग अपने खतरनाक मंसूबों को कामयाब बनाने में लगे हुए है?

किसान भाईयों को इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए… आन्दोलन करना, विरोध करना हम सबका अधिकार है लेकिन हमारे आन्दोलन का कोई दुरूपयोग ना करें इसकी भी जिम्मेदारी हम सबकी ही है.