कोरोना वैक्सीन रूस के बाद अब चीन में हुआ अप्रूव, भारत में वैक्सीन की ये है स्थिति

रूस की कोरोना वैक्सीन को लेकर अभी चर्चा खत्म भी नहीं हुआ है कि चीन ने भी वैक्सीन को लेकर एक खुशखबरी दे दी है. यहां के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कैन्सिनो बायोलॉजिक्स इंक (CanSino Biologics Inc) की कोरोना वैक्सीन Ad5-nCoV को पेटेंट यानी लाइसेंस मिल गया है. खबरों के मुताबिक, वैक्सीन के पेटेंट के लिए 18 मार्च को ही अनुरोध किया गया था, लेकिन अब जाकर 11 अगस्त को इसकी मंजूरी मिली है. इस वैक्सीन को चीनी सेना और कैन्सिनो बायोलॉजिक्स कंपनी ने मिलकर तैयार किया है. चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक वैक्सीन लॉन्च हो सकती है यानी यह बाजार में आ सकती है.

Can the clause for a 'compassionate use' be invoked to fast track ...

फिलहाल चीन की इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल दुनिया के कई देशों में चल रहा है. चीन का कहना है कि ट्रायल के दौरान वैक्सीन की प्रभावी क्षमता का आकलन किया जाएगा. अगर ये सफल रहा तो ही इसे बाजार में उतारा जाएगा. हालांकि खबरों की मानें तो चीन ने अपने सैनिकों को कोरोना का टीका लगाना शुरू भी कर दिया है.

वही अगर भारत में वैक्सीन की बात करें तो ग्‍लोबली टॉप कैंडिडेट्स के अलावा, सरकार देश में बनी दो वैक्‍सीन के ट्रायल पर भी नजर रखे हुए हैं. भारत बायोटेक-ICMR की बनाई Covaxin और जायडस कैडिला की ZyCov-D का फिलहाल ट्रायल चल रहा हैं. इसके अलावा सरकारी पैनल जिन वैक्‍सीन कैंडिडेट्स की तरफ देख रहा है, उसमें Oxford-AstraZeneca और Moderna फेज 3 ट्रायल्‍स में हैं. इसके अलावा जर्मनी और इजरायल समेत दुनिया के नौ और वैक्‍सीन प्रोग्राम पर भी सरकार विचार कर रही है.

यहां आपको ये भी बता दें कि रूस ने अपनी कोरोना वैक्‍सीन तो लॉन्‍च कर दी है. मगर भारत उसे फेस वैल्‍यू पर नहीं लेना चाहता. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत को उनकी वैक्‍सीन Sputnik V के ट्रायल डेटा का इंतजार है. इस वैक्‍सीन के भारत के उत्‍पादन की कोशिशें भी चल रही हैं और कई फार्मा कंपनियां रूसी डायरेक्‍टर इनवेस्‍टमेंट फंड के संपर्क में हैं. हालांकि बेहद कम लोगों पर ट्रायल के चलते इस वैक्सीन का खासा विरोध हो रहा है.

विश्व भर में इस वक्त 29 कोरोना वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल से गुजर रहा हैं. इसके अलावा 138 वैक्‍सीन ऐसी हैं जो प्री-क्लिनिकल स्‍टेज में हैं यानी जिनका डेवलपमेंट या जानवरों पर टेस्टिंग चल रही है. दुनियाभर के एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि सेफ कोरोना वैक्‍सीन आने में अगले साल की शुरुआत तक का समय लग सकता है. आमतौर पर किसी वैक्‍सीन को डेवलप कर बाजार में उतारने में 10-12 साल लगते हैं मगर कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इस प्रक्रिया को बेहद तेज किया गया है.