गेहूं के बाद अब चायपत्ती के निर्यात पर संकट, इस वजह से लौटाया जा रहा है

भारतीय चाय उत्पादकों (Indian Tea Producers) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इस वर्ष भारत की चाय को खरीदने से कई देशो ने इंकार कर दिया है, देशों के द्वारा खेप लौटाने से भारतीय चाय उद्योग (Indian Tea Industry) को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इंटरनेशनल और घरेलू दोनों मार्केट द्वारा भारतीय चाय (Indian Tea Return) की खेप को लौटाने के बाद इसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अब चाय की कीमतों (Tea Price) में 30-40 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट ने उत्पादकों की टेंशन बढ़ा दी है। कई देशों ने भारत (India) के द्वारा भेजी गई चाय (Tea) की खेप को वापस कर दिया है।  इनका कहना है कि चाय में तय मात्रा से अधिक कीटनाशकों (High Pesticide Content)का इस्तेमाल किया गया है।

अत्रायधिक रासायन के प्रयोग बताया गया कारण

दुनिया के कई देशों ने भारत के द्वारा निर्यात की गई चाय (Tea) को वापस लौटा दिया है. चाय में ज्यादा कीटनाशक (High Pesticide Content) और रासायन के प्रयोग के चलते ऐसा हुआ है। देश में बेची जाने वाली चाय भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानदंडों के अनुरुप होनी चाहिए लेकिन अधिकांश खरीदार जो चाय खरीद रहे हैं उसमें रासायनिक सामग्री असमान्य रुप से अधिक है। दरअसल, श्रीलंका में संकट के कारण वहां से चाय का निर्यात घट गया है। इसका लाभ भारत के व्यापारी उठाना चाह रहे हैं। हालांकि, खेप लौटाने के कारण अब निर्यात होने वाली शिपमेंट में गिरावट आ रही है।

30 करोड़ किलो चाय निर्यात है लक्ष्य

अधिकतर खरीदार तय मात्रा से अधिक रसायन वाली चाय ही खरीद रहे हैं. साल 2021 में भारत ने 195.90 मीलियन किलोग्राम चाय का निर्यात किया था. चाय के प्रमुख खरीदार राष्ट्रमंडल (सीआईएस) राष्ट्र और ईरान थे. इस साल बोर्ड का लक्ष्य इस 30O मिलियन किलो चाय का लक्ष्य हासिल करना है. बहुत सारे देश चाय आयात करने में काफी सख्त नियमों को अपना रहे हैं. अधिकतर देश इसके लिए यूरोपीय संघ के मानकों को अपना रहे हैं. इसके बाद कुछ देश FSSAI के मानकों को अपना रहे हैं।

चाय पैकरों और निर्यातकों से मिली शिकायतें

इस मुद्दे पर चाय पैकरों और निर्यातकों की ओर से शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा, “यह दोहराया जाता है कि उत्पादकों को मौजूदा एफएसएसएआई मानदंडों का सख्ती से पालन करना चाहिए. मानदंडों के संशोधन का मुद्दा उत्पादकों के संगठनों द्वारा एफएसएसएआई के साथ उठाया गया है. यह स्पष्ट है कि निर्यात को आयात करने वाले देशों के मौजूदा मानदंडों का पालन करना चाहिए.”

 इसलिए हो रही हैं ये दिक्कतें

पिछले कुछ सालों में चाय बागानों में ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बहुत बदलाव आ रहे हैं। कभी भारी बारिश होती है तो कभी लंबे समय तक रूखा रहता है, ऐसे में कीड़ों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में कीटनाशक का अधिक इस्तेमाल करना पड़ता है और कई बार दवा का असर खत्म होने से पहले ही चाय की पत्तियां तोड़ ली जाती हैं। बता दें कि कीटनाशक के इस्तेमाल से 10-20 दिन बाद ही पत्तियों को तोड़ना चाहिए, वरना चाय की पत्ती पर कीटनाशक का असर रह जाता है। अगर इसका पालन नहीं किया जाता है तो कीटनाशक का असर रह जाता है।