पाताल शिवलिंग के दर्शन मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप

दुमका: बासुकीनाथ धाम की उत्तरी दिशा में स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व वाले शिवगंगा अपनी गर्भ में कई पौराणिक कथा व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं समेटे हुए है। उन्हीं में से एक है शिवगंगा के मध्य में स्थित कुंड में विराजमान पाताल शिवलिग। पाताल शिवलिग की महिमा निराली है। मान्यता है कि उसके दर्शन, पूजन मात्र से सभी जन्मों के पाप धुल जाते है व मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
बासुकीनाथ धाम स्थित शिवगंगा का इतिहास करीब 679 वर्ष पुराना है। इस पवित्र सरोवर के बीच स्थित एक कुंड में एक पवित्र शिवलिग है। पिछले कई वर्ष पूर्व शिवगंगा की साफ-सफाई के दौरान कुंड मिला व तकरीबन दस-पंद्रह फीट खुदाई पश्चात नीचे स्थित पाताल शिवलिग के समीप सिदूर, त्रिशूल व अन्य प्राचीन सामग्री सहित एक शिलापट्ट भी मिला, जिसमें शिवगंगा के स्थापना काल की तिथि 1342 ई. अंकित है। शिवगंगा के जल की पूर्णरूपेण निकासी के बाद निकलने वाले इस पाताल शिवलिग के पूजन को भक्तों का तांता लगा रहता है। इस शिवलिग का दर्शन सिर्फ शिवगंगा की सफाई व जल पूरी तरह से सूखने के दौरान ही संभव है। लोग इस पवित्र शिवलिग का दर्शन व पूजन करने को सदैव लालायित रहते हैं।
भक्त बताते हैं कि जब शिवगंगा की सफाई होती है तो वे इस पवित्र शिवलिग का दर्शन करने जरूर आते हैं। वहीं इस पाताल शिवलिग के प्रधान पुजारी अनिल पंडा, मंदिर के पुजारी सदाशिव पंडा, संसार पंडा सहित अन्य लोग भी इसकी महिमा विस्तारपूर्वक बताते हुए कहते है कि पाताल शिवलिग के दर्शन होने पर नित्य भक्तों के द्वारा विधि विधान पूर्वक श्रृंगार पूजन भी किया जाता है।
बासुकीनाथ के अनिल पंडा ने बताया कि बासुकीनाथ मंदिर की उत्तरी दिशा में स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक शिवगंगा के मध्य में विराजमान पाताल महादेव की महिमा निराली है। शिवगंगा की पूर्णरूपेण साफ-सफाई के पश्चात ही इनके दर्शन होते हैं। पाताल महादेव की कुंड में मौजूद एक शिलापट्ट भी मिला है, जिसमें शिवगंगा के स्थापना काल का वर्ष 1342 ई. अंकित है। पाताल महादेव के दर्शन के उपरांत इनके पूजन व श्रृंगार के लिए भक्तों की भारी भीड़ जुटती है।