एक भारतीय परिवार हर साल प्रति व्यक्ति 50 किलो पका-पकाया खाना बर्बाद करता है: रिपोर्ट

भारत में जहाँ बड़ी संख्या में लोगों के भूखे रहने की नौबत आती है तो वहीं एक भारतीय परिवार हर साल प्रति व्यक्ति 50 किलो पका-पकाया खाना बर्बाद करता है. देश की पूरी आबादी पर ये खाना काफ़ी ज़्यादा होगा. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है. ये रिपोर्ट हमारे लिए बहुत शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है. भारतीय संस्कृति में जहां अन्न को देवता का दर्जा दिया गया है और यही वजह है कि यहां खाना झूठा छोड़ना या उसका अनादर करना भी पाप माना जाता है. लेकिन इस आधुनिकता की अंधी दौड़ में शायद हम अपना ये संस्कार भूल गए हैं. इस तरह की रिपोर्ट सच्चाई से रूबरू करवाती है और हमें अपने अंदर झांकने पर मजबूर भी करती है…पूरी रिपोर्ट क्या है आईए जानते है….

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रिपोर्ट में पूरी दुनिया की अगर बात करें तो दुनिया भर में 931 मिलियन मीट्रिक टन (93 करोड़ 10 लाख टन) खाना बर्बाद होता है. ये दुनिया भर में उपलब्ध कुल खाने का 17 प्रतिशत हिस्सा है. ये दावा संयुक्त राष्ट्र की फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट-2021 में किया गया है. यानी जितना खाना बर्बाद होता है उससे दुनिया की एक बड़ी आबादी की भूख मिटाई जा सकती है. ये सुन कर आपको जरा गुस्सा जरूर आया होगा की भारत में प्रत्येक व्यक्ति कितना खाना बर्बाद करता है, लेकिन थोड़ी सी ही सही पर राहत महसूस होगी जब मैं आपसे कहूं कि एशिया में प्रति व्यक्ति भोजन की बर्बादी भारत में सबसे कम है.

रिपोर्ट के कहा गया है कि साल 2019 में ये खाना घरों, खुदरा दुकानदारों, रेस्तरां समेत भोजन करवाने की अन्य जगहों पर बर्बाद हुआ. सबसे ज्यादा खाना घरों में बर्बाद हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में साल 2019 में औसत रूप से प्रति व्यक्ति 121 किलो पका-पकाया खाना हो जाता है. वही  भारत में प्रति व्यक्ति ये बर्बादी हर साल 50 किलो होती है. जबकि बांग्लादेश में 65 किलो, मालद्वीप में प्रति व्यक्ति सालाना 71 किलो, आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान में यही आंकड़ा 74 किलो है, श्रीलंका में 76 किलोग्राम, नेपाल में 79 किलोग्राम, भूटान में प्रति व्यक्ति सालाना 79 किलो, अफगानिस्तान में सलाना 82 किलोग्राम खाना बर्बाद हो जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कई देशों ने अब तक ये पता लगाना नहीं शुरू किया है कि वो कितना खाना फेंक रहे हैं. सरकारों को ट्रैकिंग करने की जरूरत है ताकि इसकी साफ तस्वीर सामने आ सके. वही अभी ये पता लगाने जा रहा है कि इंसान तक पहुंचने से पहले कितना खाना बर्बाद होता है ये पता लगने के बाद और भी सटीक आंकड़े सामने आ सकेंगे.

 

रिपोर्ट कहती है, खाने की बर्बादी का सीधा असर पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. इसे रोकते हैं तो ग्रीन गैसों का उत्सर्जन घटेगा. जमीन अधिक उपलब्ध होगी, प्रदूषण घटेगा और खाने को तरस रहे लोगों के लिए भोजन उपलब्ध किया जा सकेगा.

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण प्रोग्राम की डायरेक्टर इंगर एंडरसन कहती हैं, अगर जलवायु परिवर्तन, कुदरत को होने वाला नुकसान और प्रदूषण रोकना है तो मिलकर काम करना होगा. सरकारों और नागरिकों को खाने की बर्बादी को रोकना होगा.

एक तरफ खाने की बर्बादी तो दूसरी तरफ भूख की समस्या. संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) के मुताबिक, साल 2019 में 69 करोड़ लोग खाने को तरसे यानी ये लोग भूखे रहे थे. वही अगर साल 2020 की बात करें तो महमारी में जिस तरह की तबाही मची है उसे देखते हुए ये आंकड़ा और ज्यादा बढ़ा हुआ साबित हो सकता है.

Global Hunger Index Report Concerns For India - ग्लोबल हंगर इंडेक्स की  रिपोर्ट भारत के लिए चिंता पैदा करने वाली - Amar Ujala Hindi News Live

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 में 107 देशों की लिस्ट में भारत 94वें नंबर पर है. वर्ष 2019 में भारत 117 देशों की लिस्ट में 102वें नंबर पर था. 2018 में भारत को 119 देशों की लिस्ट में 103 नंबर पर रखा गया था. 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे चल रहा है. कुल 107 देशों में से केवल 13 देश भारत से खराब स्थिति में हैं. वैश्विक भूख सूचकांक की रिपोर्ट के अनुसार भारत की 14 फीसदी आबादी कुपोषण का शिकार है.

संयुक्त राष्ट्र की फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट-2021 की रिपोर्ट कहती है कि  खाने की बर्बादी को रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएं ताकि ये जरूरतमंदों तक पहुंच सके. हालाँकि इस रिपोर्ट में दुनिया की औसत बर्बादी और कई देशों के मुक़ाबले भारत में ये बर्बादी कम है, फिर भी यदि इसे रोक दिया जाए तो भारत की वैश्विक भूख सूचकांक में सुधार हो सकता है.