इंसानों से पहले इस जीव को लग चुका है कोरोना का टीका, जानें क्यों?

भारत समेत दुनिया भर के कई देशों में अब कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन आ गई है और इसी के मद्देनजर टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है. ऐसे में लोग वैक्सीन लगने का इंतजार भी कर रहे है. लेकिन जहां लोग वैक्सीनेशन का इंतेजार कर रहे है. वही दुनिया में एक ऐसा भी जीव है जिसे इंसानों से भी पहले कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है. ऐसा क्यों किया गया है चलिए जानते है….

Coronavirus Vaccine Endangered Black Footed Ferrets Get Experimental Covid  19 Vaccine - इंसानों से भी पहले इस जीव को लगाई गई थी कोरोना की वैक्सीन, वजह  जानते हैं आप? - Amar Ujala

ये जीव आमतौर पर अमेरिका के कोलोराडो में पाए जाते हैं.इनका नाम फेरेट्स है. ये मुस्टेला निगराइप्स प्रजाति के जीव हैं. ये नेवले की एक प्रजाति है जो अमेरिका में ज्यादा पाई जाती है. दरअसल, इस जीव की प्रजाती खतरे में है इसलिए इन्हें इंसानों से पहले ही कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है. पिछले साल गर्मियों में ही फोर्ट कोलिंस के पास स्थित ‘नेशनल ब्लैक फुटेड कंजरवेशन सेंटर’ में काले पैर वाले 210 फेरेट्स को प्रयोगात्मक तौर पर कोरोना वैक्सीन की खुराक दी गई थी.

कंजरवेशन सेंटर के अनुसार, अब तक फेरेट्स में कोरोना संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन ये इस तरह के वायरस से आसानी से संक्रमित हो सकते हैं, इसलिए उन्हें पहले ही वैक्सीन लगा दी गई. जीव विज्ञानियों के मुताबिक, इंसानों के साथ-साथ ऐसे जीवों को भी कोरोना का टीका लगाया जाना चाहिए, जो विलुप्तप्राय या खतरे में हैं.

जानकारी के मुताबिक, साल 1980 तक ऐसा माना जा रहा था कि फेरेट्स विलुप्त हो गए हैं, लेकिन 1981 में अमेरिकी राज्य व्योमिंग में कुछ फेरेट्स दिखाई दिए, इसके बाद इन्हें बचाने की मुहिम शुरू हुई. फिलहाल अभी रे गणना के मुताबिक अमेरिका में 370 से अधिक फेरेट्स मौजूद हैं. ये फेरेट्स अमेरिका के उत्तरी इलाके में स्थित ग्रेट प्लेन्स के घास वाले इलाकों में पाए जाते हैं.

Ferrets were given the Corona vaccine in the US | इस देश में जंगलों से  ढूंढकर विचित्र जीव को लगाई जा रही है कोरोना वैक्सीन, जानिए क्या है कारण |  Hindi News,

फेरेट्स और मिन्क्स दोनों एक ही प्रजाति के जीव हैं. दोनों करीबी रिश्तेदार हैं. मिन्क्स में कोरोना के मामले मिले थे, जिसके बाद कई अमेरिकी राज्यों और यूरोपीय देशों में उन्हें मारा गया था. साइंटिस्ट नहीं चाहते कि कोरोना का वायरस फेरेट्स को संक्रमित करने के बाद म्यूटेशन कर ले. क्योंकि उन्हें नहीं पता इनके शरीर में म्यूटेशन करने के बाद वायरस और कितना ज्यादा खतरनाक हो जाएगा.

कंजरवेशन सेंटर के अनुसार, फेरेट्स को एमआरएनए(mRNA) आधारित कोरोना वैक्सीन दी गई थी. हालांकि कुछ फेरेट्स को वैक्सीन नहीं भी लगाई गई है. इसके पीछे सोच ये रही कि अगर वैक्सीन के कुछ साइड-इफेक्ट होते हैं और कुछ अनहोनी होती है तो कम से कम कुछ फेरेट्स तो सुरक्षित रहें और इनकी प्रजाति आगे बढ़ाई जा सके.

हालांकि, फिलहाल जिन फेरेट्स को वैक्सीन लगाई गई थी, वो अभी तक सुरक्षित हैं. साथ ही उनके शरीर में कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज भी बन गई हैं. हालांकि फेरेट्स में ये वैक्सीन कितनी प्रभावशाली है, इसको लेकर अभी ट्रायल नहीं हुआ है.