BJP का दलबदलू नेता पर भरोसा तो कांग्रेस को कोली समुदाय का सहारा

गुजरात के जसदान सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. बीजेपी ने इस सीट से कुंवर जी बावलिया को टिकट दिया है. वहीं, कांग्रेस को कोली समुदाय के सहारे की उम्मीद है. गुजरात विधानसभा चुनाव में जसदान निर्वाचन क्षेत्र में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. बीजेपी जहां दल-बदल कर आए कुंवरजी बावलिया पर भरोसा कर रही है, वहीं कांग्रेस को बावलिया के कोली समुदाय के समर्थन से ये सीट अपने पास बरकरार रहने की आस है. बावलिया 2018 में ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे और उपचुनाव में यह सीट अपने पास बरकरार रखी थी. लेकिन पांच बार के विधायक बावलिया को इस बार अपने पूर्व करीबी एवं अन्य कोली नेता भोलाभाई गोहिल से कड़ी टक्कर मिल सकती है, कांग्रेस ने इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा है. जसदान राजकोट जिले के पिछड़े निर्वाचन क्षेत्रों में आता है. इस सीट पर गुजरात विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में एक दिसंबर को मतदान किया जाएगा. इस निर्वाचन क्षेत्र में करीब 2.6 लाख मतदाता हैं जिनमें कोली समुदाय के करीब एक लाख लोग हैं तथा करीब 60,000 पाटीदार शामिल हैं. अन्य मतदाताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग , दलित एवं मुसलमान शामिल हैं. इस क्षेत्र को प्रतिबद्ध कोली वोट बैंक के चलते कांग्रेस का गढ़ माना गया है.

हम आपको बता दे की, बीजेपी ने यहां पर उप चुनाव जीता है. कोली सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में संख्या की दृष्टि से एक बड़ा समुदाय है. जो तटीय क्षेत्रों में उनकी अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है. वर्ष 1995 से बावलिया ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर लगातार चार बार 1995, 1998, 2002 और 2007 में जसदान सीट जीती थी. वह 2009 में राजकोट सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. वह 2014 में राजकोट से बीजेपी उम्मीदवार से लोकसभा चुनाव हार गए थे. कांग्रेस ने एक बार फिर उन्हें जसदान विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया तथा उन्होंने जीत दर्ज की गई थी. 2017 में बावलिया एवं प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में मतभेद हो गया है, जिसके चलते वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए है और  बावलिया ने 2018 में बीजेपी के टिकट पर जसदान विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की है.,