रंग ला रही खेती के जरिए पर्यावरण बचाने और कमाने की मुहिम

धनबाद: धनबाद के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रवि निषाद की मां की मौत 2014 में प्रदूषण के कारण हो गई थी। इससे रवि को गहरा सदमा लगा और वे अपने सपनों को भुलाकर पर्यावरण बचाने के मिशन पर निकल पड़े। उन्होंने दो वर्षों में हजारों लोगों को पेड़-पौधे बांटे ताकि कोयलांचल धनबाद में हरियाली बढ़े और प्रदूषण का स्तर कम हो सके। रवि को जब लगा कि इससे कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आ रहा है तब उन्होंने 40 डिसिमिल जमीन पर गेंदे के फूल की खेती शुरू की। इसके बाद धीरे-धीरे लोग उनसे जुड़ते गए और कारवां बनता गया। लेकिन यह तो महज एक शुरुआत थी। इसके बाद रवि ने किसानों से बंजर जमीन लीज पर लेना शुरू किया और एक टीम बनाकर उन बंजर भूमि को उपजाऊ लायक बना उसपर खेती शुरू की। रवि का यह मिशन सफल रहा। आज रवि 110 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। ऑर्गेनिक फार्मिंग से वो सालाना 20 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई भी कर रहे है।

रवि के इस प्रयास से 20 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। रवि के कारण कोरोना काल में दूसरे राज्यों में वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को भी आरपीए फार्मिंग का सहारा मिला है। प्रवासी मजदूर अब बाहर नहीं जाना चाहते। टुंडी के रहने वाले महेश किस्कू का कहना है कि उसके कई साथी हैदराबाद में काम करते थे। लॉकडाउन में सभी वापस घर लौट आए और अब हम सभी आरपीए फार्मिंग से जुड़ चुके हैं। रेलवे में आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले बिनोद वर्मा की नौकरी कोरोना काल में छूट गई थी और अब वे भी फार्मिंग से जुड़ गए हैं। माइंस में ड्रिल ऑपरेटर की नौकरी करने वाले रूपेश महतो बताते हैं कि ड्रिंलिंग के दौरान धूल-कण से काफी परेशानी होती थी। तभी लगा कि पर्यावरण बचाना जरूरी है। अगर पर्यावरण नहीं बचा तो लोगों की जिंदगी बेहाल हो जाएगी। इसी दौरान रवि निषाद से उनकी मुलाकात हुई और वे भी आरपीए फार्मिंग से जुड़ गए। उम्मीद यही है रवि ने पर्यावरण बचाने की जो अलख जगाया है वो आगे चलकर एक मिसाल बने।