महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर केंद्र सरकार सख्त, गृह मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी

देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराध को देखते हुए शनिवार को गृह मंत्रालय ने नई एडवाइजरी जारी की है. ये एडवाइजरी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी की गई है. इस एडवाइज़री में चेतावनी देते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई की जाने की बात कही गई है.

NCRB Report Uttar Pradesh tops the list in crimes against women in country  hindi

दरअसल, अभी हाल ही में हुए हाथरस कांड को लेकर पुलिस के कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे. मामले ने इतना तुल पकड़ा कि ये कई दिनों तक राष्ट्रीय स्तर पर बना रहा. केंद्र और राज्य सरकार पर विपक्ष ने आरोप लगाया की वे महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. ऐसे में अब गृह मंत्रालय ने इसपर संज्ञान लेते हुए महिलाओं के सुरक्षा के मद्देनज़र नई एडवाइज़री जारी की है.

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आईए जानते है इस एडवाइज़री की मुख्य बातें….

संज्ञेय अपराध की स्थिति में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज की जाए. इसके तहतजीरो एफआईआरका भी प्रावधान है. ज़ीरो एफआईआर मतलब ये की अगर अपराध थाने की सीमा से बाहर हुआ हो तो भी पुलिस को FIR दर्ज करना होगा.

-IPC की धारा 166 A(c)(छाछठ) के तहत, FIR दर्ज करने पर अधिकारी को सजा का प्रावधान है.

-CRPC के सेक्शन 173 में रेप से जुड़े मामलों की जांच दो महीनों में करने का प्रावधान है. गृह मंत्रालय ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां से मामलों की मॉनिटरिंग हो सकती है.

सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A(चौसठ) के मुताबिक, बलात्‍कार या यौन शोषण के मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़िता का परीक्षण उसके सहमति से किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर से कराया जाना चाहिए.

मृतका का लिखित या मौखिक बयान एक साक्ष्य के तौर पर लिया जाएगा.

फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने की गाइडलाइंस बनाई हैं. उनका पालन हो.

पुलिस की ओर से अगर इन प्रावधानों का पालन नहीं किया जाता है तो ये देश में पीड़िता को न्याय देने में प्रभावित कर सकता है. अगर पुलिस की लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए.

गृह मंत्रालय ने कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश इस दिशा में सभी संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं. ताकि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके.हाथरस कांड पर हो रहे बवाल के बीच केंद्र सरकार द्वारा महिला सुरक्षा को लेकर ये कदम अहम माना जा रहा है.