नई संसद भवन इमारत के निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाईं रोक, जानिये इसके पीछे क्या है वजह

भारत का नया संसद भवन बनने जा रहा है.. संसद भवन की नई इमारत का डिजाइन त्रिभुज के आकार का होगा और पुराने परिसर के पास इसका निर्माण होगा. नए भवन का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड करेगी.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  नए संसद भवन के निर्माण के लिए भूमि पूजन 10 दिसंबर को करेंगे लेकिन नये संसद भवन के निर्माण कार्य पर सुप्रेम कोर्ट ने रोक लगा दी.. ये रोक क्यों लगाई गयी है इसपर हम आगे बात करेंगे लेकिन पहले हम नए संसद भवन से जुडी कुछ ख़ास बातों को जान लेते हैं..

लोकसभा अध्यक्ष के अनुसार, संसद की नयी इमारत भूकंप रोधी क्षमता वाली होगी और इसके निर्माण में 2000 लोग सीधे तौर पर शामिल होंगे तथा 9000 लोगों की परोक्ष भागीदारी होगी. उन्होंने बताया कि नए संसद भवन में 1224 सांसद एकसाथ बैठ सकेंगे और मौजूदा श्रम शक्ति भवन (संसद भवन के निकट) के स्थान पर दोनों सदनों के सांसदों के लिए कार्यालय परिसर का निर्माण कराया जाएगा.

आपको बता दें कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मोदी सरकार की एक अहम परियोजना मानी जा रही है. इसके तहत नए संसद भवन के साथ कई अन्य भवनों का निर्माण किया जाना है. इसके लिए मौजूदा संसद भवन के आसपास के इलाके में काफी बदलाव भी किया जाएगा.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का क्या है मास्टर प्लान

केंद्र ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच नई इमारतें बनाने के लिए सेंट्रल विस्टा का मास्टर प्लान तैयार किया है।

प्रोजेक्ट के मुताबिक पुराने संसद भवन के सामने गांधीजी की प्रतिमा के पीछे नए तिकोना संसद भवन का निर्माण किया जाएगा।

इसमें लोकसभा और राज्यसभा के लिए एक-एक इमारत होगी, लेकिन सेंट्रल हॉल नहीं बनेगा। यह इमारत 13 एकड़ जमीन पर तैयार किया जाएगा।
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के लिए 10 बिल्डिंग बनाई जाएंगी। राष्ट्रपति भवन, मौजूदा संसद भवन, इंडिया गेट और राष्ट्रीय अभिलेखागार की इमारत को वैसे ही रखा जाएगा।

लेकिन अब इस परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है दरअसल इस योजना के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गयी है. जिसको दरकिनार करते हुए नई संसद भवन की इमारत के निर्माण कार्यके लिए भूमि पूजन का एलान कर दिया… लेकिन इस रीडेवलपमेंट प्लान से जुड़े कई मुद्दे शीर्ष अदालत में विचाराधीन हैं. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सोलिसिटर जनरल से कहा कि “आप कागजी कार्रवाई करें या नींव का पत्थर रखें, इससे हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन कोई निर्माण नहीं होना चाहिए.”  मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने कहा कि ऐसा नहीं सोचा था कि केन्द्र इसके निर्माण के लिए इतने आक्रामक तरीके से आगे बढ़ेगा. केन्द्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को यह निर्देश स्पष्ट तौर पर समझना चाहिए कि जब तक मामला अदालत द्वारा तय नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्माण कार्य नहीं होगा. मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि जब तक कि अदालत अपना फैसला नहीं दे देती तब तक सेंट्रल विस्टा में कोई निर्माण, तोड़फोड़ या पेड़ों की शिफ्टिंग नहीं होगी..

दरअसल 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि भूमि के उपयोग में अवैध रूप से बदलाव किया गया है और अदालत से इस प्रोजेक्ट को रद्द करने का आग्रह किया.. इस प्रोजेक्ट के तहत दर्जनों पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं.

Central Vista परियोजना  में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, उत्तर और दक्षिण ब्लॉक की इमारतें, जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की इमारतें आती हैं. केंद्र सरकार एक नया संसद भवन (New parliament house), एक नया आवासीय परिसर बनाकर इस क्षेत्र का फिर से विकास करना चाह रही है. इसी परियोजना को Central Vista Project का नाम दिया