भारत के आगे फेल हुई चीनी कोरोना वैक्सीन, आखिर क्यों छुपाये जा रहे हैं आकड़े?

कोरोना की वैक्सीन तो वायरस फैलाने वाले देश यानि चीन ने भी बना ली है लेकिन क्या कारण है कि अधिकतर देश अब चीन के कोरोना वैक्सीन से दूरी बना रहे हैं और भारत में बनी वैक्सीन पर भरोसा जता रहे हैं.. ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन की वैक्सीन ने धोखा दे दिया है… हम ये भी कह सकते हैं कि धोखा वैक्सीन ने नही बल्कि चीन ने दिया है.. ऐसा क्यों कहा जा रहा है आप इस वीडियो में समझ पायेंगे
दरअसल चीन की सिनोवैक कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन ‘कोरोनावैक’ का ब्राजील और तुर्की में ट्रायल किया गया। इन दोनों ही देशों द्वारा जारी किए गए ट्रायल के डाटा में काफी अंतर पाया गया, जिसने चीन की इस वैक्सीन के प्रभावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। कुछ वक्त पहले ब्राजील ने कहा था कि चीनी कंपनी सिनोवैक बायोटक द्वारा विकसित वैक्सीन उसके यहां ट्रायल में 50 फीसद प्रभावी पाई गई है। लेकिन ब्राजील की तरफ से ट्रायल के नतीजे नहीं जारी किए गए, क्योंकि चीनी कंपनी ने उसे डाटा सार्वजनिक नहीं करने की हिदायत दी थी. वहीँ दूसरी तरफ तुर्की के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की थी कि चीन की वैक्सीन निर्माता कंपनी सिनोवैक की वैक्सीन ‘कोरोनावैक’ 91.25 फीसदी प्रभावी है.

कहा गया था कि चीनी कंपनी सिनोवेक (Sinovac ) और सिनोफर्म (Sinopharm) द्वारा निर्मित वैक्सीन को अन्य पश्चिमी देशों की वैक्सीन की तरह कोल्ड स्टोरेज में रखने की आवश्यकता नहीं है, जबकि अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित वैक्सीन सिर्फ़ ठंडे तापमान में ही रह सकती है.. ऐसी कई बातें कहीं गयी थी जो चीनी वैक्सीन को ठीक साबित कर रही थी इतना ही चीन की दोनों कंपनियों ने अपनी वैक्सीन के 78% प्रभावी होने का दावा कर रही थीं, जो WHO के तय किए गए मानक (50%)  से काफी अधिक था..
लेकिन चीनी वैक्सीन के कम प्रभावशाली होने के बाद अब इस बात की चर्चा अधिक हो रही है कि चीनी वैक्सीन कितनी कामयाब है? इसका जवाब तो डाटा आने के बाद ही मिल सकता है लेकिन डाटा तो सार्वजनिक किया ही नही जा रहा है.

वहीँ दूसरी तरफ भारत में बनी वैक्सीन की तारीफ हो रही है. अमेरिका और ब्राजील के बाद अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. भारत बीते कुछ दिन में अपने यहां बने कोविड-19 टीकों की खेप भूटान, मालदीव, नेपाल, बांग्लादेश, म्यामां, मॉरीशस और सेशेल्स को मदद के रूप में भेज चुका है. सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और मोरक्को को ये टीके व्यावसायिक आपूर्ति के रूप में भेजे जा रहे हैं.

Photograph of a medical vial labeled coronavirus vaccine, injection only, 5 ml

वही दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने भी भारत के सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. सीरम इंस्टीट्यूट कुछ दिनों में दक्षिण अफ्रीका को 15 लाख कोविशील्ड की डोज सप्लाई करेगा, जिसे हेल्थवर्कर्स को लगाया जाएगा. दक्षिण अफ्रीका में कोरोना के 14 लाख से भी ज्यादा केस सामने आ चुके हैं जबकि 40 हजार लोगों की जान जा चुकी है. यहां हर दिन औसत 12 हजार नए केस दर्ज किए जा रहे हैं.