नागरिकता संशोधन बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी, जानें क्या कहता है नया कानून

नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill 2019) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। 12 दिसंबर की देर रात को राष्ट्रपति ने विधेयक पर हस्ताक्षर किया, जिसके बाद नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 लागू हो गया है। यानी पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थी आसानी से भारत की नागरिकता हासिल कर पाएंगे।

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इस बिल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले लोकसभा, फिर राज्यसभा में पेश किया था। कई घंटों की बहस के बाद ये बिल सदन में पास हुआ, लोकसभा में तो मोदी सरकार के पास बहुमत था लेकिन राज्यसभा में बहुमत ना होने के बावजूद सरकार को जीत मिली है।

क्या है नागरिकता संशोधन कानून?

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नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई। बिल के कानून बनने के साथ ही इसमें बदलाव हो गया। अब पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी। अभी तक उन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था।

पहले भारत की नागरिकता लेने पर 11 साल भारत में रहना अनिवार्य होता था, लेकिन अब ये समय घटा कर 6 साल कर दिया गया है।

आखिर क्यों हो रहा है इस कानून का विरोध?

इस कानून का विरोध देशभर में पुरजोर तरीके से हो रहा है, सड़क से लेकर संसद तक लोग सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां इस कानून को संविधान का उल्लंघन कह रही हैं और भारत के मूल विचारों के खिलाफ बता रही हैं।

कानूनी नज़रिए से अलग पूर्वोत्तर में इस बिल का विरोध इसलिए हो रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इसका असर उनकी अस्मिता पर पड़ेगा। पूर्वोत्तर के कई छात्र संगठनों का कहना है कि बाहरी लोग अगर असम-अरुणाचल समेत अन्य राज्यों में बसेंगे, तो उनकी भाषा, अस्मिता, संस्कृति पर असर पड़ेगा और ये बड़ा नुकसान होगा। वहीं, बीजेपी का इसपर कहना है कि इस बिल के लागू हो जाने से देश के किसी जाति या धर्म की पहचान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।