CSIR की स्टडी में दावा- कोरोना को खत्म करेगा ये खास तरह का पौधा!

देश और पूरी दुनिया भर में कोरोना वायरस को लेकर अभी भी तरह-तरह के रिसर्च किए जा रहे है. इस बीच एक स्टडी सामने आई है, जिसमें खुलासा हुआ है कि एक खास तरह का पौधा कोरोना को बढ़ने से रोकने में मददगार साबित हो सकता है. स्टडी में पाया गया है कि वेल्वेटलीफ पौधा और इसकी जड़ Sars-CoV-2 वायरस को बढ़ने से रोक सकता है. ये शोध सरकार की Council of Industrial and Scientific Research (CSIR) के तीन लैब में किया गया है.

Weed of the month: Velvetleaf // Integrated Crop and Pest Management News Article // Integrated Pest Management, University of Missouri

हालांकि ये स्टडी अभी कहीं प्रकाशित नहीं हुई है और इसकी समीक्षा की जानी अभी बाकी है. CSIR में जीनोमिक्स और मॉलिक्यूलर मेडिसिन डिपार्टमेंट की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर मिताली मुखर्जी ने एक नीजी चैनल हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि, ‘सबसे पहले हमने एक कनेक्टिविटी मैप का इस्तेमाल किया. इसका इस्तेमाल किसी भी दवा की उपयोगिता जानने के लिए किया जाता है. ये पौधा कई एंटीवायरल की तरह ही काम करता है. हमारे लैब स्टडी में भी यही साबित हुआ.’

डॉक्टर मिताली मुखर्जी के मुताबिक,  ‘इस पौधे के अर्क का इस्तेमाल आयुर्वेद में पहले से ही बुखार, विशेष रूप से डेंगू और कुछ हार्मोनल समस्याओं में किया जाता है. ये पूरी तरह सुरक्षित है. हालांकि सिर्फ क्लिनिकल ट्रायल के जरिए ही जाना जा सकता है कि ये लोगों में संक्रमण की गंभीरता या समय को कम करने में मदद करता है या नहीं.’

स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि ये पौधा वायरस के सेल कल्चर पर काम करता है. वेल्वेटलीफ पौधे का अर्क पानी में मिलाने से इसके सेल कल्चर में वायरल कंटेट को 57%(संतावन) और हाइड्रो-अल्कोहलिक अर्क (पानी और शराब से बना एक घोल) को 98%(अंठानबे) तक कम कर दिया. शोधकर्ताओं ने इस पौधे के अर्क में पाए जाने वाले कई अणुओं का परीक्षण किया. जिससे पता लगा कि इसमें पाए जाने वाला पैरेइरेरिन 80% तक असरदार है.

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कई विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक,’बीमारियों के इलाज के लिए पौधे के अर्क का इस्तेमाल करने का सिद्धांत कोई नया नहीं है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण कुनैन है. इसका उपयोग मलेरिया के इलाज के लिए किया जाता है. ये सिनकोना के पेड़ से निकलता है.’

इस स्टडी को लेकर डाक्टरों का कहना है कि ‘वर्तमान शोध बहुत ही शुरुआती चरण में है. वैज्ञानिकों को इसके इनग्रेडिएंट्स और रासायनिक संरचना को अच्छे से पहले समझना होगा. फिर जा कर कोई उपयोगी दवा बनानी होगी.’ ऐसे में अगर ये परिक्षण सही साबित होता है तो जल्द ही कोरोना को खत्म करने के लिए हमारे पास एक और नया हथियार होगा.