जलवायु परिवर्तन के चलते अल्बाट्रॉस पक्षियों के बीच बढ़ रहे हैं ‘तलाक’ के मामले

जलवायु परिवर्तन के चलते हमें ज्यादा गर्मी महसूस होने लगी। कई जगहों पर भारी बारिश और सूखे जैसे हालात भी बनते दिख रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसे जीव हैं जिनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। जलवायु परिवर्तन के चलते अल्बाट्रॉस पक्षियों के बीच ‘तलाक’ के मामले बढ़ रहे हैं। यह खबर हैरान कर देने वाली है पर यह बात सच है। एल्बैट्रोस (Albatross) दुनिया के सबसे विशाल पंखों वाले समुद्री पक्षियों (Seabirds) में से एक होते हैं जो समुद्र की मछलियां खाकर अपना जीवनयापन करते हैं. ये दक्षिणी महासागरों और उत्तरी प्रशांत महासागरों में पाए जाते हैं. इनके बारे में कहा जाता है कि ये इंसान की तरह अपना साथी चुनते हैं और उसे चुनने के बाद जीवन भर उसके साथ रहते हैं.

अल्बाट्रॉस पक्षी जो दुनिया के उन गिने चुने जीवों में से एक हैं जो अपने साथी के प्रति जीवनभर वफादार रहते हैं।  लेकिन हाल ही में हुए अध्ययन से पता चला है की ये पक्षी अपने साथी के साथ नहीं रहना चाहते और उन्हें छोड़ रहे हैं। और इस का सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन मन जा रहा है। जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि हो रही है उसके कारण समुद्र का तापमान भी बढ़ रहा है जो इन जीवों के आपसी संबंधों पर भी असर पड़ रहा है।

गर्मी बढ़ने से पक्षियों के लिए बढ़ी मुश्किल

अध्ययन में पाया गया है कि गर्म होते महासागरों (Oceans) के कारण ही एल्बैट्रोस (Albatross) के जोड़ों में अलगाव जैसी स्थितियां आ रही हैं क्योंकि उन्हें मछलियों (Fishes) हासिल करने में मुश्किल होती जा रही है।  शोधकर्ताओं की एक टीम ने पाया है कि फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर पाए जाने वाले इन खूबसूरत भूरे-काले रंग के अल्बाट्रॉस पक्षियों के बीच अपने साथी को छोड़ने की घटनाओं में इजाफा हुआ है।

एल्बैट्रोस (Albatross) जीवनसाथी के प्रति वफादारी के लिहाज से बहुत अनोखे पक्षी होते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि एक संगमन (Monogamy) और साथी से बहुत लंबा संबंध इनकी बड़ी विशेषता होती है. शोधकर्ताओं ने लंबा जीवन जीने वाले काले पंखों वाले एल्बैट्रोस के आंकड़ों का अध्ययन किया जिन्हें वैज्ञानिक तौर से थालासार्के मेलनोफिर्स कहा जाता है. ये दक्षिण अटलांटिक के फॉकलैंड द्वीपों (Falkland Islands) में पाए जाते हैं।

इस वजह से टू रही हैं जोड़ियां

शोधकर्ताओं के मुताबिक इन पक्षियों को जलवायु परिवर्तन के चलते जिस द्वीप पर ये रहते हैं उसके आसपास खाना मिलने में मुश्किल हो रही है। तापमान बढ़ने के साथ शिकार के लिए इन पक्षियों को लम्बे समय के लिए दूर-दराज तक उड़ान भरनी पड़ रही है। ऐसे में अगर पक्षी को प्रजनन के मौसम से पहले वापस लौटने में देरी हो जाती है तो उनके साथी, अपने लिए नए पार्टनर चुन लेते हैं।

हो रही पोषण की कमी

तापमान बढ़ने से भोजन की उपलब्धता घटने से इनमें पोषण की भी कमी हो रही है। ऐसी स्थिति में यह पक्षी संतानोत्‍पत्ति में विफल हो रहे हैं। जोड़ियां टूटने का ये भी एक कारण है। समुद्र का तापमान बढ़ने से इन पक्षियों के लिए स्थितियां पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो चुकी हैं जो उनमें स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ा रही हैं। यह भी उनके अलग होने की एक संभावित वजह हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले कुछ सालों मे गर्म समुद्री सतह के तापमान में गड़बड़ियों (SSTA) के कारण मादा पक्षियों को सफल संबंध होने के बाद भी साथी बदलने पर मजबूर कर रही हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि बदलते जलवायु के हालात के कारण एल्बैट्रोस (Albatross) की प्रजनन (Breeding) प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं. इससे उनके अलागाव की दर सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है.