कोरोना से बढ़ रहा है प्रदूषण! समुद्र में पहुंच रहीं इस्तेमाल हुई पीपीई किट्स-ग्लव्ज और मास्क

कोरोना काल ने कई लोगों की जिंदगी छीन ली और अभी भी ये सिलसिला जारी है.लेकिन अब कोरोना वायरस पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है. इस समय विश्व भर के लिए जानलेवा कोरोना वायरस एक चुनौती तो है ही इसके साथ ही इसका कचरा भी एक बड़ी चुनौती बनकर हम सबके सामने खड़ी है.

जैसा की जानते है कि कोरोना वायरस से लड़ने और बचने के लिए हम मास्क, ग्लव्ज और किट्स का इस्तेमाल करते है. इस्तेमाल करने के बाद इन्हें फेक देते है और इसे ही हम कोरोना का कचरा कहते है.

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस से बचने के लिए इस्तेमाल की हुई चीजें फेकने के बाद ये ना सिर्फ इंसानों के लिए खतरनाक है, बल्कि ये वेस्ट पालतू पशुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है. इतना ही नहीं, कोरोना का कचरा बहकर समुद्र में पहुंचने के बाद जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

समुंद्र के पानी में तैरते मास्क और प्लास्टिक कचरे को समुंद्र की मछलियां अपना भोजन समझ रही हैं. विश्व भर के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जहां समुद्र के तटों पर ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है.

पर्यावरण के कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जानलेवा कोरोना वायरस समुद्र के प्रदूषण को और बढ़ा सकती है. प्लास्टिक कचरे के रूप में ये समुंद्र के जीवन को खतरे में डाल सकती है. विश्व भर से आई तस्वीरें जिसमें जेलीफ़िश जैसे तैरते हुए डिस्पोजेबल मास्क और सीबेड्स में बिखरे हुए दस्ताने ये सभी खतरनाक साबित हो सकते हैं.

दरअसल, कोरोना का जो कचरा है ये लंबे समय तक भी नष्ट नहीं होंगे. कार्बन से बने इन पॉलीमर की उम्र करीब 450 साल है. प्लास्टिक के जैसे ही ये वेस्ट भी हजारों सालों तक पर्यावरण के लिए एक खतरा के रूप में मौजूद रहेंगे.

यहां आपको ये भी बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के एक अनुमान के अनुसार, हर महीने दुनियाभर में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सिर्फ मेडिकल स्टाफ के लोगों को करीब 8 करोड़ ग्लव्ज, 16 लाख मेडिकल गॉगल्स के साथ 9 करोड़ मेडिकल मास्क की आवश्कता पड़ रही है. ये सिर्फ आधिकारिक मेडिकल स्टाफ के आंकड़े ही हैं. इस एक महीने के रिपोर्ट से आप अंदाजा लगा सकते है कि कितने बड़े पैमाने पर कोरोना का कचरा जमा हो रहा है.

हालांकि, इन सबके बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहां इससे निपटने के लिए सख्ती बरती जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में कोरोना को लेकर इस्तेमाल किए गए मास्क, ग्लव्ज और ऐसी ही तमाम चीजों को खुले में फेंकने पर सख्त पाबंदी है.

कोरोना का कचरा अपने साथ बहुत सारी चुनौतियों को लेकर सामने आया है. ये आने वाले समय में और खतरा पैदा कर सकता है. ऐसे में जरूरत है सरकारों को इसके लिए ठोस और सख्त कदम उठाने की.