CT-SCAN करवाना पड़ सकता है महंगा! AIIMS डायरेक्टर ने दी सलाह

कोरोना वायरस जांच की सटीक रिपोर्ट निकलवाने के लिए लोग सिटी स्कैन का रुख अधिक कर रहे हैं. भारत में पाया गया कोरोना का डबल म्यूटेंट वैरिएंट आरटी-पीसीआर टेस्ट (RT-PCR) में आसानी से डिटेक्ट नहीं हो रहा है और यही वजह है कि लोग कोरोना की जांच के लिए बिना कुछ सोचे-समझे सीटी स्कैन (CT Scan) कराने पहुंच जा रहे हैं लेकिन जो लोग सिटी स्कैन को ज्यादा तवज्जों दे रहे हैं ऐसे लोगों के लिए AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने चेतावनी दी है.

णदीप गुलेरिया ने कोरोना के हालातों पर सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सीटी स्कैन कराने वाले लोगों को अलर्ट किया. डॉ. गुलेरिया ने बताया कि कोविड शुरू होने के तुरंत बाद सीटी स्कैन कराना कोई खास फायदेमंद नहीं है. कोरोना से संक्रमित होने के बाद चेस्ट में पैच आ जाते हैं, जो इलाज के साथ-साथ खत्म भी होते जाते हैं. उन्होंने बताया कि सीटी स्कैन मशीन से निकलने वाले रेडिएशन काफी नुकसानदायक होते हैं, जो 300 एक्सरे के रेडिएशन के बराबर होते हैं. यही वजह है कि सीटी स्कैन रेडिएशन कैंसर का खतरा बढ़ा देता है. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि लोगों को डॉक्टरों की सलाह पर पहले छाती का एक्सरे कराना चाहिए और जब डॉक्टर सीटी स्कैन करने की सलाह दें, तभी सीटी स्कैन कराना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोरोना काल में लोग खुद ही डॉक्टर बन जा रहे हैं और अपनी मर्जी से सीटी स्कैन कराने पहुंच जा रहे हैं. उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कई लोग ऐसे भी हैं जो हर तीन महीने में एक बार सीटी स्कैन करा रहे हैं, जो बहुत खतरनाक है. एम्स डायरेक्टर ने कहा कि लोगों को खून की जांच भी कराने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. जिन मरीजों को कोरोना के हल्के लक्षण हैं, वे साधारण दवाइयों से भी ठीक हो जाते हैं, उन्हें स्टाइरॉइड की जरूरत नहीं पड़ती.

डॉ. गुलेरिया के मुताबिक अगर माइल्ड इंफेक्शन है और मरीज होम आइसोलेशन में है साथ ही ऑक्सिजन सेचुरेशन ठीक है तो सीटी स्कैन ना कराएं। अगर सक है तो पहले चेस्ट एक्सरे करा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बाद में सीटी स्कैन कराएं।

हालाँकि कोरोना के बढ़ते प्रकोप से लोग परेशान हैं यही वजह है कि बिना डॉक्टर की सलाह और परामर्श के ही लोग सिटी स्कैन करवा रहे हैं.. जो एक गंभीर बीमारी दे सकता है.