लगातार तीसरे साल दिल्ली बना दुनिया का सबसे प्रदूषित राजधानी, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

दिल्ली और प्रदूषण का रिश्ता कैसा है ये कौन नहीं जानता है..लेकिन क्या आप जानते है कि दिल्ली दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित राजधानी है. यहां की हवा में सांस लेना मानों कई तरह की बीमारियों को दावत देना है..सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी दिल्ली में हवा नहीं सुधर रही है..ऐसा क्यों हो रहा है इसपर मंथन और प्रयास जारी है..लेकिन यहां आपको दुनिया भर में प्रदूषण को लेकर आई एक ताजा रिपोर्ट के बारें में बता देते है….इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई है और ये पहली बार नहीं है बल्कि ऐसा लगातार तीसरी बार हो रहा है.

Air pollution caused 16 lakh deaths in India Rs 3 lakh crore loss in GDP|  TV9 Bharatvarsh
स्विट्जलैंड की संस्था IQAir की 2020 वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट में 106 देशों के प्रदूषण स्तर का डेटा जांचा गया. इसमें दुनिया के 50 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 35 भारत में मौजूद है. जिसमें दिल्ली सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर और दुनिया की सबसे ज्यादा प्रदूषित राजधानी बन गई है.वही देशों की रैंकिंग में बांग्लादेश की स्थिति सबसे खराब बताई गई है. इसके बाद पाकिस्तान और भारत की हवा की गुणवत्ता सबसे खराब बताई गई है.

IQAir अध्ययन के अनुसार साल 2020 में दक्षिण एशिया में वायु की गुणवत्ता दुनिया में सबसे ज्यादा खराब थी. इसी वजह से दक्षिण एशिया में लगभग 13 से 22 फीसदी मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई हैं. लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने के अलावा वायु प्रदूषण की वजह से दक्षिण एशिया की GDP को 7.4 फीसदी का नुकसान हुआ है.

IQAir ने ये रिपोर्ट देश में PM 2.5 पार्टिकल्स के सालान औसत के आधार पर निकाला है. ये ऐसे कण होते हैं जो 2.5 माइक्रोन व्यास के होते हैं. PM2.5 कण बेहद महीन होते हैं और इन्हें आंखों से देखना संभव नहीं है. 2.5 माइक्रोमीटर के आकार के ये मैटर पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण और इससे होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण हैं. इनके संपर्क में ज्यादा देर तक रहने की वजह से कई घातक बीमारियां हो सकती हैं. इतना घातक कि ये कैंसर और दिल संबंधी रोगों को भी जन्म दे सकते हैं.

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रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में दिल्ली में PM 2.5 का स्तर काफी ज्यादा रहा, जो फेफड़ों से संबंधित बीमारियों को जन्म देती है. ग्रीनपीस साउथईस्ट एशिया एनालिसिस और IQAir के अध्ययन के मुताबिक, साल 2020 में नई दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण लगभग 54 हजार लोगों की मौत समय से पहले हुई थी. दिल्ली में इतनी मौते तब हुई हैं, जब पूरे देश में कोरोना वायरस महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन की वजह से PM 2.5 के वार्षिक औसत में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बाद भी दिल्ली समेत भारत के हालात इतने खराब रहे.

हालांकि, इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि साल 2019 के मुकाबले साल 2020 में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है. लेकिन इस सुधार के बावजूद भी दिल्ली लगातार तीसरे साल दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी रही है और देशों की रैंकिंग में भारत तीसरे स्थान पर रहा. ऐसे में साफ है कि दिल्ली समेत पूरे देश में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और यह लोगों की बीमारी और समय से पहले मौतों का अहम कारण बन रहा है. ऐसे में जरूरत है वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तेजी से प्रयास करने की.