हाथी के मौत पर लाचार वन विभाग! मामले को एक-दुसरे पर थोपने में लगे वन अधिकारी!

एक बेजूबान जानवर शिकारियों के चंगुल में फंस कर मर गया लेकिन अधिकारी और प्रशासन आपस की लड़ाई में उसके दोषियों तक पहुचने के बजाय एक अलग ही विवाद में उलझे हुए हैं..
आगे बढ़ने से आपको पूरा मामला समझना पड़ेगा.. लगभग 70 दिन पहले एक हाथी तड़प तड़प कर मर जाता है इसके पीछे की वजह थी उसके सूंड में एक मशीन फंस गयी थी.. जंगली जानवरों का शिकार करने वाली मशीन… सूंड में मशीन फंस जाने की वजह से हाथी कुछ ना खा पाया और न कुछ पी पाया और उसके बाद उसकी मौत हो गयी.. अब प्रशासन को चाहिए था कि ऐसे लोगों का पता लगाये तो जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए इस प्रकार के मशीनों को जंगलों में लगाते हैं जिसकी वजह से हाथी की जान गयी.. लेकिन वन विभाग तो मानों मामले को इधर से उधर टालने में लगा हुआ है.

दरअसल गिरदीह के डुमरी में 30 नवंबर की शाम मर गया था.. पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया। पता चला कि हाथी में सूंड में मशीन फंस गयी थी..जिसके बाद हाथी भोजन, पानी व सांस नहीं ले सका। पेट में न अन्न था, न पानी …. इसके बाद अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई।
लेकिन अब मशीन किसने लगाईं? कौन जब्गली जानवरों को शिकार करना चाहता था कौन है हाथी की मौत का जिम्मेदार ये पता लगाने के बजाय गिरिडीह वन प्रमंडल और धनबाद वन प्रमंडल के अधिकारी दामन बचाने में लग गये। हमारे नहीं दूसरे के क्षेत्र में मशीन फंसी, इस पर अड़ गए। अभी तक किसी को भी हाथी की मौत के लिए जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सका है और ना ही किसी कि गिरफ्तारी हो सकी है जबकि घटना को हुए 70 दिन बीत चुके हैं.
वहीँ इस घटना पर -राजीव कुमार, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी डुमरी, गिरिडीह वन प्रमंडल का कहना है कि सुअर पकडऩे की मशीन गिरिडीह प्रमंडल क्षेत्र में नहीं लगाई गई। यह धनबाद के टुंडी जंंगल में लगाई गई सूंड़ फंसने के बाद ग्रामीणों ने हाथी को खदेड़ा। वह डुमरी पहुंचा और मर गया। हाथी भोजन, पानी व सांस नहीं ले सका। पेट में न अन्न था, न पानी। मतलब उनका कहना है कि धनबाद जिले में मशीन लगाईं थी जहाँ उसकी सूंड में मशीन फंस गयी और उसकी मौत हुई

अब -विनोद ठाकुर, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी टुंडी, धनबाद प्रमंडल का कहना है कि सुअर पकडऩे की मशीन धनबाद के जंगलों में नहीं लगाई गई। हाथी कहां हैं, इसकी रोज रिपोर्ट डीएफओ को देते हैं। यह घटना गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ की है। डुमरी के वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी अनावश्यक टुंडी एवं धनबाद का नाम उछाल रहे हैं।
मतलब अब दोनों जिले के बन अधिकारी अब इस विवाद में उलझे हुए है कि आखिर सूअर पकड़ने की मशीन लगाईं कहाँ गयी थी? बजाय इसके की इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कारवाई की जाए.. वैसे आपने इंसानों की मौत, दुर्घटना आदि पर पुलिस को सीमा विवाद में उलझते हुए देखा होगा लेकिन झारखण्ड का वन विभाग तो अब जानवरों की मौत पर इसी तरह के विवाद में उलझता दिखाई दे रहा है.
वैसे झारखंड में तो मानों अब इस तरह की रीत चल पड़ी है,, जब जंगली जानवर शिकारियों के बिछाएं जाल में फंस जाते हैं और अपनी जान गंवा देते हैं… मरने के बाद वन अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कुछ लोगों को गिरफ्तार कर मामले को रफा दफा कर देते हैं लेकिन प्रशासन के इसी रवैये की चपेट में जंगली जानवर चढ़ रहे हैं.

10 जनवरी को लोहे के जाल में एक तेंदुआ फंसकर मर गया। एक ग्रामीण गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। कहा जाता है कि कि सुअर व अन्य छोटे जंगली जानवरों के शिकार के लिए ग्रामीण और शिकारी युवक ऐसे जाल लगाते हैं। ताकि उनका मांस बेच सकें लेकिन अब इन शिकारियों की भेंट बड़े और संरक्षित जानवर चढ़ते जा रहे हैं..