क्या इससे पहले आप चाँद के बेटो के बारें में जानते थे? अगर नही तो आज जान जाओगे

आज हम आपको बताएगें चांद से निकलें एक ऐसे पत्थर के बारें में जो हर साल धरती के चारों तरफ चक्कर लगाता है. जानकारी के अनुसार यह धरती के चारों तरफ करीब 1,44,84,096 किलोमीटर की दूरी से निकलता है. इस पत्थर का आकार फेरी-व्हील के जैसे है. यानि कि करीब 190 फीट व्यास का है. अब जाकर वैज्ञानिकों ने इसकी एक रिपोर्ट जर्नल नेचर कम्यूनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित की है. जिस रिपोर्ट में इसके बारें में डिटेल में बताया गया हैं. तो चलिए शुरू करते हैं इस वीडियो को जिसमें हम आपको इसकी पूरी जानकारी देगें.

Water On Moon: Know About Discovery Of Water On Moon By NASA - नासा को चांद  पर कैसे मिला पानी और अब आगे क्या, जानें सब - Navbharat Times

आपको बता दें एक स्टडी के अनुसार कामो-ओलेवा का लाइट स्पेक्ट्रम चांद से मिलता जुलता हैं क्योकि अपोलो मिशन से लाए गए पत्थरों का लाइट स्पेक्ट्रम भी बिल्कुल इसी के जैसा था. जिस वक्त चांद बन रहा था उस वक्त उससे निकलने वाले कचरे में से यह पत्थर अलग हो गया था और अब यह सूरज की कक्षा में चक्कर लगा रहा है. वैज्ञानिकों को लगता है कि यह पत्थर करोड़ों साल बाद धरती के नजदीक चक्कर लगा रहा है लेकिन किसी को यह बात पता नहीं थी.

NASA warns- Greater than London Eye asteroid rapidly approaching Earth |  International News in Hindi | NASA ने दी चेतावनी- पृथ्वी की ओर तेजी से आ  रहा है London Eye से बड़ा

चाँद से निकलें पत्थर का नाम
इस पत्थर का नाम कामो-ओलेवा हैं. वैज्ञानिक ने इसे एस्टेरॉयड की श्रेणी में रखा हैं. बताया गया हैं की यह पहला एस्टेरॉयड है जो चांद से पैदा हुआ है और धरती के चक्कर लगा रहा है. जबकि वैज्ञानिकों का कहना हैं कि इसके अध्ययन से धरती और चांद के प्राचीन संबंधों का खुलासा हो सकता है. कामो-ओलेवा एक हवाइयन शब्द हैं जिसका मतलब होता है घूमता हुआ अंतरिक्ष का टुकड़ा. जानकारी के अनुसार इसकी खोज हवाई के एस्ट्रोनॉमर्स ने साल 2016 में Pan-STARRS टेलिस्कोप से की थी.

क्षुद्रग्रह और धूमकेतु क्या है? क्या किसी क्षुद्रग्रह (Asteroid) का भी  चंद्रमा है? - नन्हीसियोना - हिन्दी ब्लॉग

आपको जानकर हैरानी होगी की इसे कोई भी इंसान अपनी खुली आंखों से नहीं देख पाता हैं. इसकी वजह ये हैं की ये आंखों से दिखने वाली वस्तुओं के मुकाबले 40 लाख गुना ज्यादा धुंधला होता है. हर साल यह अप्रैल के महीने में धरती के नजदीक से चक्कर लगाता हैं और फिर आगे की तरफ निकल जाता है. लेकिन वैज्ञानिक इसे देखने के लिए ताकतवर टेलिस्कोप की मदद लेते हैं जिससे वो कुछ समय के लिए इसे देख पाते हैं. आपको बता दें की यह लगभग 1.44 करोड़ किलोमीटर की दूरी से निकलता है. जबकि यह दुरी धरती और चांद की दूरी से 40 गुना ज्यादा है.

बड़ा खुलासा! चांद के साथ बड़ा बेटा कामो-ओलेवा और तीन भाई भी लगा रहे धरती का  चक्कर, जानिए कैसे - moon rock asteroid kamooalewa orbiting close to earth |  Dailynews

प्लैनेटरी साइंस की प्रोफेसर रेनू मलहोत्रा ने बताया
इस विषय को लेकर रेनू मलहोत्रा का कहना हैं कि कामो-ओलेवा का धरती से नजदीकी रिश्ता है. यह चांद का बेटा है. यह पत्थर उससे तब अलग हुआ होगा, जब धरती से चांद अलग होकर अपने निर्माण की प्रक्रिया में लगा था. चांद तो धरती के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में रह गया लेकिन यह चांद का यह बेटा दूर निकल गया. चांद का यह टुकड़ा यानी एस्टेरॉयड कामो-ओलेवा कैसे चांद से निकला इसकी सही गणना नहीं हो पाई है.

चांद ही नहीं, बड़ा बेटा 'कामो-ओलेवा' और तीन भाई भी लगा रहे धरती का चक्करः  स्टडी - Science AajTak

लेकिन इसकी जमीन, रसायनिक प्रक्रिया और धातुओं की जांच करके यह स्पष्ट हुआ है कि यह पत्थर चांद से अलग हुआ था. सिर्फ इतना ही नहीं कामो-ओलेवा के तीन भाई और हैं, जो सौर मंडल में धरती के चारों तरफ चक्कर लगा रहे हैं. इसके आलावा रेनू बताती हैं की चांद से निकले ये पथरीले भाई प्राचीन समय से अलग हुए हैं और इसको लेकर अभी भी जांच जारी है. जानकारी के अनुसार इन क्वासी सैटेलाइट्स के जन्म और विकास पर भी स्टडी हो रही है. वैज्ञानिकों अनुमान यह भी हैं कि कामो-ओलेवा और उसके तीन भाई अगले 300 साल तक अपनी कक्षा में चक्कर लगाते रहेंगे.

 

STORY BY – UPASANA SINGH