पर्यावरण संरक्षण मंच द्वारा “लॉकडाउन में पर्यावरण की स्थिति” पर चर्चा! डा. राकेश भास्कर ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता

5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पर्यावरण संरक्षण मंच द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया गया. चर्चा के लिए विषय था ” लॉकडाउन में पर्यावरण की स्थिति”. पर्यावरण संरक्षण मंच द्वारा आयोजित इस चर्चा की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक डा. राकेश भास्कर द्वारा किया गया. जिसका सीधा प्रसारण पर्यावरण पोस्ट के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया गया.

भू-वैज्ञानिक से लेकर उद्योगपति हुए शामिल 

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में अरुण कुमार (भू वैज्ञानिक), कुमार गणेशम झा (माय होम इंडिया), राम इन्दर सिंह कोचर ( मैनेजिंग डायरेक्टर, एएल मेहताब), प्रदीप जी महाराज (कथाचक, पर्यावरणप्रेमी) मौजूद रहे. हालाँकि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, एसटी मोर्चा बीजेपी समीर उरांव और पोंड मैन के नाम से मशहूर रामवीर तंवर को भी शामिल होना था लेकिन किसी कारणवश दोनों मेहमान कार्यक्रम में शामिल नही हो पाए!

“सिर्फ सरकार ही नही बल्कि हर व्यक्ति का कम है पर्यावरण को संरक्षित करना”

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पर्यावरण संरक्षण मंच के अध्यक्ष डा. भास्कर ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा करना किसी एक व्यक्ति, सरकार अथवा संस्था का काम नही है बल्कि इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी! उन्होंने कहा कि कुछ महीने के लिए इंसान घरों में कैद हुआ तो पूरा वातावरण निखर कर सामने आ गया. हवा शुद्ध हो गयी, पानी निर्मल हो गया, आसमान साफ़ हो गया.. लेकिन लॉकडाउन खुलते ही पूरा वातावरण फिर दोषित होना शुरू हो गया. हमें दोषित हो रहे पर्यावरण पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है.

“कोरोना ने सिखाया प्रकृति का महत्व”

वहीँ प्रदीप भैया जी महाराज ने कार्यक्रम कोरोना के दौरान पर्यावरण, प्रकुति और आयुर्वेद की तरफ बढ़ते रूझान पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि कोरोना आने के बाद जब कोई इलाज नही मिला तो लोग एक दुसरे से गिलोय के बारे में पूछते नजर आये. कोरोना से वही लोग ज्यादा प्रभावित दिखे जो एसी की हवा ज्यादा खाते हैं. उन्हीं लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी जो साफ़-स्वच्छ वातावरण से दूर हो गये. जो लोग प्रकृति के नजदीक रहने वाले हैं उनपर कोरोना वायरस का कोई ख़ास प्रभाव नही पड़ा.

“धरती पर जिन्दगी बचाने के लिए छोड़ना होगा प्रकृति का दोहन”

भू वैज्ञानिक अरुण कुमार ने इस चर्चा के दौरान कहा कि अगर हम सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमें पर्यावरण को कम से कम या ना के बराबर नुकसान पहुंचाना होगा. हमें सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करना होगा ना कि प्रकुति का शोषण! उन्होंने कहा कि अगर हम ये नही चाहते कि पर्यावरण हमें बर्बाद कर दे, धरती का विनाश कर दे तो हमें पर्यावरण को दोहन रोकना पड़ेगा. अगर पर्यावरण का शोषण नही रुका तो ना जाने कितने वायरस कोरोना वायरस की तरह से हमला कर सकते हैं. किसी भी देश की मिसाइल वायरस के प्रति कारगर नही होगा. अगर आप प्रकृति की संरचना को छेड़ेंगे, प्रकुति का दोहन करेंगे तो इस तरह के वायरस अटैक कर सकते हैं.

“कोरोना काल में लगे लॉकडाउन से घटी प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग”

उद्योगपति राम इन्दर सिंह कोचर जो एएल महताब इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस की वजह से लगाए गये लॉकडाउन में भी उनकी फैक्ट्री लगातार प्लास्टिक रीसाइक्लिंग का कार्य कर रही थी. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में प्लास्टिक एकत्रित करने में कमी आई इसीलिए रीसाइक्लिंग में कमी हुई. हालाँकि उन्होंने इस पार प्रकाश डाला बायोमेडिकल वेस्ट की संख्या में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे निपटना एक चुनौती है.

“लॉकडाउन में स्वच्छ हुआ वातावरण, नदियाँ हुई थी निर्मल “

कुमार गणेशम झा(माय होम इंडिया) ने लॉकडाउन में हुए पर्यावरण में बदलाव की तरफ ध्यान केन्द्रित करवाया. कुमार गणेशम ने कहा कि लॉकडाउन में हमारा पर्यावरण इतना स्वच्छ हो गया था कि दूर दूर से पहाड़ नजर आने लगे थे. हवा स्वच्छ हो गयी थी. लॉकडाउन होने की वजह फैक्ट्री बंद थी तो नदियों का पानी स्वच्छ हो गया. ये एक उदाहरण है कि हम पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करने का मतलब ये बिलकुल नही है कि फैक्ट्री बंद कर दिया जाए बल्कि जरूरत ये है कि उन चीजों का उपयोग बंद या कम किया जाय जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं.  हमें ऐसी चीजों के उपयोग  को बढ़ावा देना होगा जो प्रकुति को नुकसान कम पहुंचाते हो!

पर्यावरण के सभी पहलूओं को भी जीडीपी में  किया जाये शामिल

चर्चा के दौरान भू-वैज्ञानिक अरुण कुमार ने संस्था के अध्यक्ष डा. राकेश भास्कर से सरकार को एक ज्ञापन सौंपने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और जीडीपी के लिए जो भी मापदंड तय किये गये हैं उसमें पर्यावरण के सभी पहलुओं को भी शामिल किया जाये.  हमारी नदियाँ सुरक्षित हैं, वृक्षों की संख्या बढ़ी है, प्रदुषण का स्तर कितना है इसे भी जीडीपी में शामिल किया जाए क्यूंकि इनकी भी वैल्यू हैं. केवल हम इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन को जीडीपी का पैरामीटर ना बनाये. इसको लेकर एक ज्ञापन सरकार के सामने रखा अजय ताकि सरकार इस पर विचार करें और इसे लागू किया जाये!

कार्यक्रम के समापन पर डा. भास्कर ने कहा कि हमें ये सोचना चाहिए कि हम पर्यावरण के बिना जीवन संभव ही नही है फिर भी हमें इसके लिए आज भी लोगों को जागरूक क्यों करना पड़ रहा है क्योंकि लोगों ने पर्यावरण और प्रकृति से दूरी बना ली है. हालाँकि भारत में सरकार पर्यावरण की दिशा में कार्य कर रही है लेकिन सिर्फ सरकार के प्रयास से पर्यावरण को हम संतुलित नही कर पायेंगे. जैसा कि हमने देखा कि कुछ दिनों के लॉकडाउन से ही पर्यावरण स्वच्छ हो गया.. और जैसे ही लॉकडाउन खुला फिर पर्यावरण की स्थिति बिगड़ गयी. ऐसे में हमें ये समझने में कोई दिक्कत नही होनी चाहिए कि हमारी वजह से ही प्रकुति और पर्यावरण को कितना नुकसान पहुँच रहा है.पर्यावरण को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए एक एक व्यक्ति को इसे आन्दोलन के रूप में लेना होगा और वृक्षारोपड़ करना होगा!