पर्यावरण पर आर्थिक संकट, हजारों प्रजातियां प्रदूषण में डूबने के कगार पर

रांचीः मॉरीशस काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करता है। पिछले साल पर्यटन से 63 अरब मॉरीशस रुपये पर्यटन से कमाए गए थे। लोग यहां बड़ी संख्या में प्राकृतिक सौंदर्य देखने आते हैं। यहां की जैव-विवधता, खासकर समुद्री जीवन पूरी दुनिया में मशहूर है। ऐसे में इस पर्यावरण संकट से न सिर्फ जलीय जीवन बल्कि उस पर निर्भर लोगों की आर्थिक स्थिति पर भी खतरा पैदा हो सकता है। कुछ दिन पहले मॉरीशस के पास हिंद महासागर में एक मूंगा चट्टान से जापान का जहाज टकराने के बाद ईंधन लीक होने की वजह से पर्यावरण संकट पैदा हो गया है। इसकी वजह से मूंगों, मछलियों और समुद्री जीवों को लेकर अधिकारी और पर्यावरणविद परेशान हैं। नागाशिकी शिपिंग कंपनी का डट वाकाशिओ मॉरीशस के दक्षिणपूर्वी तट पर 25 जुलाई को मूंगा चट्टान से टकरा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगनाथ ने देश में पर्यावरण आपातकाल का ऐलान कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय सहायता मांगी है। यह टैंकर 299.5 मीटर लंब और 50 मीटर चैड़ा है। इस पर 20 लोगों का क्रू है। यह इस वक्त जहां है उसे संवेदनशील जोन कहा जाता है।

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सबसे बड़ा पर्यावरण संकट
सरकार ने बताया कि जहाज के पतवार में दरार की वजह से ईंधन लीक हो गया था। पर्यावरण समूह ग्रीनपीस ने कहा है कि यह लीक मॉरीशस के इतिहास में सबसे बड़ा पर्यावरण संकट है। ग्रीनपीस ने अपने स्टेटमेंट में कहा है, ‘ब्लू बे, पॉइंट डि-एसनी और महीबर्ग के बहुमूल्य लगून के आसपास हजारों प्रजातियां प्रदूषण में डूबने के खतरे में हैं जिसका मॉरीशस की अर्थव्यवस्था, फूड सिक्यॉरिटी और हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है।’

इससे पहले सामने आईं सैटलाइट तस्वीरों में ईंधन जहाज से निकलता दिखाई दिया और कुछ हद तक यह तट पर भी पहुंच गया है। पीएम ने ट्वीट कर बताया, ‘वाकाशिओ के डूबने से मॉरीशस के लिए खतरे का संकेत है।’ मॉरीशस की मदद को फ्रांस आगे आया है और राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने स्पेशलिस्ट टीमें और उपकरण मॉरीशस भेजने का वादा किया है। वहीं, नागासशिकी शिपिंद कंपनी ने कहा है कि उसने टैंकर को निकालने की कोशिश की है लेकिन खराब मौसम की वजह से यह मुमकिन नहीं हो रहा है।