35 साल कैद में रहने के बाद आखिरकार आजाद हुआ हाथी, अब बदले ”कावन’ के दिन

पाकिस्तान में एक हाथी 35 सालों तक एक जर्जर चिड़ियाघर में कैद था.. सैकड़ों वर्गकिमी में घूमने वाले इस हाथी को जब एक चिड़ियाघर में कैद कर दिया गया तो इसकी हालत बदतर होती चली गयी.. हाथी डिप्रेशन में आ गया… मानशिक हालत बिगड़ गयी फिर इसे पिंजरे में बंद किया गया और बाद में इसे बेड़ियों से जकड़ दिया गया… हम जिस हाथी की बात कर रहे हैं उसका नाम है कावन
कावन की जिन्दगी शुरुवात में ऐसी नही थी.. शुरुवात में कावन इतना बदनसीब भी नही था.. लेकिन पाकिस्तान के तनाशान जियाउल हक की बेटी की एक जिद्द ने इस हाथी की जिन्दगी को तबाह करने में कोई कसर नही छोड़ी..

दरअसल कहा जाता है कि हाथी मेरी साथ जो बॉलीवुड की फिल्म है इसे देखने के बाद जियाऊल हक़ की बेटी ने एक हाथी को पालने का जिद्द किया.. इसके बाद जब जियाउल ने उस वक्त श्रीलंका के पदाधिकारियों से ये बात साझा की तो श्रीलंका की सरकार ने कावन नामी हाथी को 1985 में पाकिस्तान की सरकार ने भेंट किया था. उस वक्त उसकी उम्र 1 साल थी. कुछ दिन तक तो इस हाथी के साथ जियाउल हक का परिवार बड़ी ख़ुशी ख़ुशी रहता था लेकिन कुछ दिन बाद हक़ जियाउल के बेटी का इस हाथी से मन भर गया… इसके बाद इस हाथी को वहां से हटाकर एक चिड़ियाघर में रख दिया गया… जहाँ से इसके बुरे दिन की शुरुवात हो गयी..

जब इस हाथी को चिड़ियाघर में रखा गया तो ये अकेला था..  कैद में रहने के बाद ये परेशान रहने लगा… काफी उग्र होने लगा.. लेकिन कुछ समय बाद इसके साथ एक और हथिनी को रखा गया ताकि उसे थोड़ा शांत किया जा सके… लेकिन कुछ दिन बाद ही उचित व्यवस्था और खानपान ना मिलने की वजह से हथिनी की मौत हो गयी.. इसके बाद तो ये हाथी कावन डिप्रेशन का शिकार हो गयी.. ये एक तरफ से पागल हो गया.. इसके पैरों एन बेड़ियाँ जकड़ दी गयी इसके निशान इसके पैरों पर मौजूद है… ज्यादा घूम ना पाने की वजह से इस हाथी का वजन भी बढ़ गया था और उसके कई तरह की बीमारी हो जाने का खतरा बना हुआ था,,,


हालाँकि अब कावन कम्बोडिया पहुँच चुका है.. जहाँ उसे एक नया साथी मिल गया और नए घर, नए मालिक भी… लेकिन 35 साल की कैद और ना कितनी कानूनी लड़ाई के बाद आख़िरकार कावन को ये दिन नसीब हुआ है.

कंबोडिया की पॉप स्टार शेर ने इस हाथी को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही लीगल टीम का खर्च उठाया था. ख़ुशी की बात ये है कि लीगल टीम को जीत मिली और इस हाथी कबोदिया भेजने का आदेश दिया गया.. इस्लामाबाद से कम्बोडिया ले जाने के लिए हवाई जहाज की मदद ली गयी.. 7 घंटे की उड़ान के बाद आखिरकार ये हाथी कम्बोडिया पहुँच गया.  जहाँ इस हाथी का अब जोरदार स्वागत किया गया.. कंबोडिया के उप पर्यावरण मंत्री नेथ फीएक्त्रा ने कहा कि देश को कावन का स्वागत करने में ख़ुशी हो रही है.

उन्होंने कहा, “अब वो दुनिया का सबसे अकेला हाथी नहीं रहेगा. हम कावन को यहाँ के हाथियों के साथ ब्रीड करवाएँगे. ये जेनेटिक फ़ोल्ड को संरक्षित करने की एक कोशिश है.”

अगर बात पूरी दुनिया की करें तो पूरी दुनिया में 10 हजार करीब चिड़ियाघर हैं.. जो जंगलों की अपेक्षा 60 से 80 गुना छोटे होते हैं… यहाँ आजाद घूमने वाले जानवरों को लाकार कैद कर दिया जता हा जिससे उनके व्यवहार, मानशिक हालत पर बहुत गहरा प्रभाव् पड़ता है. कहा जाता है एशिया में एक हाथी अपने आजाद जीवन में 1 हजार वर्ग किमी घूम सकता है लेकिन जब इसी हाथी को कैद कर दिया जाए तो सोचिये उसकी हालत क्या होगी… एक रिसर्च के अनुसारहाथियों की औसत उम्र करीब 56 साल होती है लेकिन जब इन्हें चिड़ियाघर में रखा जाता है तो इनकी उम्र महज 19 साल रह जाती है. एक शोध के मुताबिक़ ये खबर सामने आई थी कि बाघ, भालू, चीता और शेर जौसे जानवर चिड़ियाघर में रखे जाने की वजह से पागल तक हो जाते है.