एशिया में मांग पूरी करने के लिए बढ़ रहा है दक्षिण अफ्रीका में गैंडों का शिकार

दुनिया में गैंडों (Rhinos) की संख्या बहुत ज्यादा नहीं हैं. जहां गैंडों की कुछ प्रजातियां संकटग्रस्त हैं, वहीं अन्य पर इनके शिकार (Poaching) होने की गतिविधियों के कारण विलुप्तप्रायः (Endangered) या संकटग्रस्त होने की का खतरा बना रहता है. इनके सींग की तस्करी के लिए इनका शिकार सबसे ज्यादा होता है. इनकी सींग में काला बाजार में बहुत ऊंची कीमत होती है. लेकिन चिंताजनक रूप से पाया यह गया है कि दक्षिणअफ्रीका में गैरकानूनी रूप से गैंडों को उनके सींग के लिए मारने की संख्याओंम बहुत तेजी आई है। 

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के पर्यावरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि शिकारी (Poachers) अब अपने शिकार के तरीके बदल रहे हैं और अब वे निजी पार्कों (Private Parks) में ज्यादा शिकार कर रहे हैं. यह तेजी विशेष रूप से साल 2022 पूर्वार्द्ध में देखने को मिली है. मंत्रालय ने बताया है कि पिछले साल के पूर्वार्द्ध की तुलना में साल 2022 में दस गैंडों का ज्यादा शिकार हुआ है. इससे कुल शिकार हुए गैंडों की संख्या 259 हो गई थी. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में मशहूर क्रूगर नेशनल पार्कर में संरक्षण प्रयास और निगरानी के बढ़ने से शिकारियों (Poachers) ने अपना ध्यान निजी पार्कों और क्वाजुलू नेटल प्रांत पर लगा दिया है. पर्यावरण मंत्री बारबरा क्रीसी ने एक बयान में कहा कि गैंडों (Rhinos) के शिकार के हालिया चलन दर्शाते हैं कि वे शिकारी क्रूगर पार्क सेदूर जा रहे हैं.

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में गैंडों (Rhinos) के शिकार की संख्या में पिछले साल भी इजाफा देखने के मिला था. जबकि साल 2020 में कोविड-19 (Covid-19) की पाबंदियों को देखते हुए इसमें काफी कमी देखने को मिली थी. दक्षिण अफ्रीका में पूरे अफ्रीका महाद्वीप के कुल विलुप्तप्रायः काले गैंडों की जनसंख्या का आधा हिस्सा पाया जाता है. इसके अलावा यह दुनिया में सफेद गैंडों की सबसे ज्यादा जनंख्या वाला इलाका है जो इस समय संकटग्रस्त के करीब का दर्जे वाला जानवर माने जाते हैं.

गैंडों (Rhinos) के शिकार में प्रायः स्थानीय शिकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आपराधिक सिंडिकेट दोनों ही शामिल होते हैं जो एक देश की सीमा के पार गैंडों के सींगों (Horns of Rhinos) की तस्करी करते हैं. दक्षिण अफ्रीकी मंत्रालय का कहना है कि यह मांग एशिया (Asia) में बहुत ज्यादा है. पीटरसन का कहना है कि अगर हमने इस गंभीर स्थिति को नहीं रोका तो अफ्रीका के बड़े पांच में से एक प्रजाति विलुप्त हो जाएगी. अफ्रीका के कई जानवरों, जैसे हाथी, भैंस, शेर और तेंदुआ जैसी कई प्रजातियों के लिए मशहूर है.