यूरोप में पड़ रहा है सूखा , सूखती नदियों से है लोग परेशान

यूरोप को अच्छी आबोहवा, सुहाने और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है. लेकिन आंकड़ों के अनुसार यूरोप आज 500 सालों में सबसे भीषण सूखे (Drought in Europe) से जूझ रहा है। आज के मौजूदा हालत यह है की यूरोपियन यूनियन और ब्रिटैन में करीब ६३% जमीन पर सूखे जैसे हालत है। जैसे-जैसे गर्मी की लहरें यूरोप की लंबाई और चौड़ाई को कवर करती हैं, विभिन्न देशों की नदियाँ इसके परिणामों का सामना कर रही हैं। हेत्वावे के कारण यूरोप में कई नदिया और जलाशय सुख गए है। 

इटली में हालत सबसे ज्यादा ख़राब

यूरोप में सबसे ज्यादा बुरे हालत शायद इटली के ही है। यहाँ हालत इतने ख़राब है की सरकार ने लोगो से पानी का इस्तेमाल सीमित करने की अपील की है। कई महीनों के सूखे और सर्दियों में कम बारिश के कारण डोरा बाल्टेया और पो में पानी का तल सामान्य के मुकाबले आठ गुना नीचे चला गया है. यह इटली की सबसे लंबी नदियां हैं. ये दोनों नदियां पूरे यूरोप के सबसे प्रमुख खेती के इलाकों की प्यास बुझाती हैं। वही वेरोना के मेयर ने गार्डन, खेल के मैदान में पानी डालने, कार या आंगन धोने और स्विमिंग पूल में पानी के इस्तेमाल पर अगस्त तक के लिए रोक लगा दी है. यह सब इसलिए किया जा रहा है जिससे कि पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।

हंगरी 50 साल के भयानक सूखे से जूझ रहा

हंगरी का वेलेंस इलाका 50 वर्ष के सबसे भीषण सूखे (Drought in Europe) से जूझ रहा है. हंगरी से  गुजरने वाली और यूरोप की बड़ी नदियों में से एक डेन्यूब नदी का जल स्तर भी तेजी से घटा है।।एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल पानी की कमी की वजह से करीब ३ लाख हेक्टेयर मक्का और करीब २ लाख हेक्टेयर सूरजमुखी की खेती प्रभावित हुई है जिससे की किसानो को करोडो का नुक्सान हुआ है।

ब्रिटेन पर मंडरा रहा सूखे का संकट

इंग्लैंड के कई हिस्सों में शुक्रवार को सूखा घोषित किया जा सकता है. इसे 1976 के बाद सबसे बड़ा सूखा कहा जा रहा है। कम बारिश के कारण इंग्लैंड के दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों समेत कई हिस्सों में सूखा घोषित किया जा सकता है। करीब 1.7 करोड़ लोग अभी तक इससे प्रभावित हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में 1.5 करोड़ लोग इससे और प्रभावित हो सकते हैं. इतना ही नहीं फसलें प्रभावित होने के चलते यहां महंगाई बढ़ने की भी आशंका है. सूखे के संकट को देखते हुए इंग्लैंड के कई हिस्सों में पीने के पानी को खरीदने को लेकर मारामारी मची हुई है। यूके सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी के अनुसार औसत से अधिक तापमान और कम बारिश होने की वजह से ब्रिटेन में अगले कुछ महीनों में खाद्यान संकट (Drought in Europe) भी पैदा हो सकता है।

जर्मनी-फ्रांस में भी खराब हैं हालात

फ्रांस में एक बार फिर से तापमान ४० डिग्री  सेल्सियस के पार जाने का अनुमान जताया है। बढ़ते तापमान के कारण जिन नदियों में कभी नैव चलती थी और सैलानियों का जमावड़ा रहता था, वे नदिया अब सुख गयी है। जर्मनी में भी हालात अलग नहीं हैं. जर्मनी में राइन नदी में पानी कम होने की वजह से वहां बड़े मालवाहक जहाज नहीं चल पा रहे हैं. सिर्फ 25 प्रतिशत जहाज ही काम कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त वहां सिंचाई के लिए पानी की कमी (Drought in Europe) भी देखी जा रही है।

मानवता के लिए बढ़ रहा है खतरा

जल वायु परिवर्तन सिर्फ किताबी बाते नहीं है , यह पूरी मानवता पर एक गहरा संकट है। अगर हम सभी अब भी नहीं सम्भले तो वो दिन दूर नहीं जब हम सब पानी की एक बूँद और साफ़ हवा के लिए तरसेंगे। जलवायु परिवर्तन परिस्थितियों को बढ़ा रहा है क्योंकि गर्म तापमान वाष्पीकरण को गति देता है, प्यासे पौधे अधिक नमी लेते हैं और सर्दियों में कम बर्फबारी होती है जिससे गर्मियों में सिंचाई के लिए उपलब्ध ताजे पानी की आपूर्ति सीमित हो जाती है। यूरोप संकट में अकेला नहीं है, पूर्वी अफ्रीका, पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी मेक्सिको में भी सूखे की स्थिति दर्ज की गई है।