पर्यावरण के संतुलन के साथ ही सभी प्रगतिशील बनें: गीता कोड़ा

चाईबासा: आज सिंहभूम सांसद गीता कोड़ा के नेतृत्व तथा पश्चिमी सिंहभूम जिला उपायुक्त अनन्य मित्तल, चाईबासा विधायक श्री दीपक बिरुवा के उपस्थिति में चाईबासा वन प्रमंडल के सौजन्य से जिला अंतर्गत झींकपानी प्रखंड अवस्थित जवाहर नवोदय विद्यालय, बिस्टमपुर में वन महोत्सव 2021 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन प्रमंडल पदाधिकारी सारंडा  चंद्रमौली प्रसाद सिन्हा, वन प्रमंडल पदाधिकारी चाईबासा सत्यम कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी पोड़ाहाट   नीतीश सिंह, सहायक समाहर्ता रवि जैन उपस्थित रहे। वन महोत्सव में उपस्थित अतिथियों को चंदन का पौधा देकर स्वागत किया गया तत्पश्चात सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वृक्षारोपण किया गया।

 

महोत्सव के दौरान अपने संबोधन में सांसद श्रीमती कोड़ा ने कहा कि विगत दिनों हम सभी वैश्विक महामारी के दौरान ऑक्सीजन की उपयोगिता को विशेष तौर पर समझा है तथा वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन हमारे जीवन पर काफी नकारात्मक असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी के संतुलन में छेड़छाड़ के कारण हमें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है जिससे हमारे आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए हम सभी को वृक्षारोपण करना अनिवार्य है। सांसद ने कहा कि पर्यावरण के संतुलन के साथ ही हम लोग भी प्रगतिशील बनें तथा आने वाले समय में बेहतर एवं स्वस्थ वातावरण तैयार करने हेतु आवश्यक रूप से पौधारोपण करें, इसके लिए हम सभी को प्रयत्नशील रहना होगा।

 

वन महोत्सव को संबोधित करते हुए उपायुक्त के द्वारा कहा गया कि जिला अंतर्गत विकास के साथ-साथ पर्यावरण को संरक्षित करना अति आवश्यक है और यह दोनों घटक एक दूसरे के पूरक हैं और हम सभी को इसे साथ लेकर चलना है। संबोधन के क्रम में चाईबासा विधायक ने कहा कि आज के विकास के दौर में पर्यावरण के संरक्षण हेतु सभी लोगों को आगे आना चाहिए और हमारी थोड़ी सी प्रयास से हमारा पर्यावरण पुनः स्वस्थ हो सकता है इसलिए जब भी मौका मिले, पेड़ अवश्य लगाएं।

 

वन महोत्सव आयोजन पर प्रकाश डालते हुए चाईबासा वन प्रमंडल पदाधिकारी ने कहा कि 1950 में के.एम. मुंशी के द्वारा वन महोत्सव का शुभारंभ किया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य है कि हम लोग विकासशील देश में निवास करते हैं जहां इकोनामी और इक्विटी के साथ इकोलॉजी को जोड़ने से ही देश का विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संपदा का पारंपरिक तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढियां भी इसका उपयोग कर सकें। कार्यक्रम के दौरान जवाहर नवोदय विद्यालय की प्राचार्य   जे.करपगामाला, प्रखंड विकास पदाधिकारी-अंचलाधिकारी झींकपानी, ए.सी.एफ, आर.एफ.ओ चाईबासा तथा चाईबासा वन प्रमंडल के सभी वनरक्षी एवं वनकर्मी उपस्थित रहे।