Extinct Animals : विलुप्त होते प्रजातियों को ऐसे बचा सकते है आप! देखिए पूरा वीडियो

समुद्रीय जीव हों या जंगल में रहनेवाले जीव जलवायु परिवर्तन के लगातार शिकार हो रहे है. इंटरनेशनल यूनियन कंजर्वेशन ऑफ नेचर के एक अध्ययन के मुताबिक, जीवों की 2500 से अधिक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, पिछली एक सदी में लाखों जीव और वनस्पति विलुप्त हो चुके हैं. वही अगर भारत की बात करें तो भारत में जंगली जानवरों, सरिसृप और पक्षियों की 133 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं. इनमें बंगाली टाइगर,एशियाई शेर, रेड हेड वल्चर या गिद्ध, साइबेरियाई क्रेन और जंगली उल्लू की प्रजातियां भी शामिल है. जबकि दस फीसदी पूरी तरह लुप्त हो चुके हैं.

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अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ यानी International nature conservation association ने पिछले दिनों राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण को दुनिया के सबसे संकटग्रस्त परिंदों में माना है. 2017 में इनकी संख्या मात्र 150 थी, जो 70 के दशक में 745 हुआ करती थी. अब इस खूबसूरत पक्षी की संख्या को बढ़ाने के लिए जैसलमेर के नेशनल डेजट पार्क में देश का पहला गोडावण प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है. आज प्रकृति के सफाईकर्मी गिद्ध 95 प्रतिशत लुप्त हो गए. घर के आंगन में लोगों के बीच रहने वाले गौरैया मैना अब बहुत कम दिखाई देते हैं.

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यहां आपको बता दें कि भारत सरकार ने साल 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था. इसका मकसद वन्यजीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. इसे साल 2003 में संशोधित किया गया और इसके तहत दंड और जुर्माना को और ज्यादा कठोर कर दिया गया. ताकि वन्यजीवों की रक्षा हो सकें. हालांकि ये कानून केवल जंगली जानवरों ही नहीं, बल्कि सूचीबद्ध पक्षियों और पौधों को भी संरक्षण प्रदान करता है.

लेकिन बावजूद इसके ये संकट में है…ऐसे में उनकी रक्षा करना ना केवल वन विभाग और सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि हम सब को भी अपनी ओर से कुछ न कुछ करना होगा तभी हम और हमारी धरती सुरक्षित रह सकेगी. ऐसे में आप सभी से पर्यावरण पोस्ट अपील करता है कि गर्मी का दिन आ रहा है तो कम से कम एक पानी का बर्तन अपने घर के आसपास रख दें ताकि प्यासे छोटे-छोटे जीव, पक्षी उसे पी सकें और जब भी मौका मिले तो पौधारोपण में अपना सहयोग दे.