आसान शब्दों में पढ़िए, वित्तमंत्री के एलान से किसे क्या मिला?

कल प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था. इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि यह पैकेज भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP of India) का करीब 10 फीसदी है.

आज के ऐलान में वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मौजूदा स्थिति से उबारने के लिए 14 उपायों की जानकारी दीं. इसमें से 6 उपाय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), 2 उपाय EPF, 2 NBFC और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (MFI’s), 1 रियल एस्टेट, 1 उपाय डिस्कॉम, 1 कॉन्ट्रैक्टर्स और 3 टैक्स के मोर्चे पर होगा.

6 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान
केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में आज 6 लाख करोड़ रुपये का ऐलान किया है. इस रकम का केवल 6 फीसदी हिस्सा सरकार द्वारा प्रोत्साहन का है. अन्य रकम लोन, लिक्विडिटी और गारंटी के तौर पर होंगे.

लोन: 3.2 लाख करोड़ रुपये
>> सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) के लिए बिना गारंटी के 3 लाख करोड़ रुपये का फ्री ऑटोमेटिक लोन दिया जाएगा. इसकी अवधि 4 साल के लिए होगी और इसमें 100 फीसदी की गारंटी होगी. 12 महीने तक इसमें कोई प्रिंसिपल रिपेमेंट नहीं देना होगा. सरकार के इस कदम से कुल 45 लाख इकाईयों को सीधे तौर पर लाभ मिल सकेगा.

>> MSME को ही अधिकनस्थ कर्ज के तौर पर 20,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इससे 2 लाख ईकाईयों को लाभ मिल सकेगा.

प्रोत्साहन: 60 हजार करोड़ रुपये
>> MSME फंड ऑफ फंड्स (Fund of Funds) के तौर पर 50 हजार करोड़ रुपये का इक्विटी इनफ्युजन.

>> बिजनेस और वर्कर्स के लिए 2,500 करोड़ रुपये का EPF सपोर्ट. यह अगले 3 महीने के लिए होगा. इससे MSME की क्षमता को बढ़ाने और मार्केट में लिस्टिंग को तैयार होने में मदद मिल सकेगी.

>> बिजनेस और वर्कर्स के लिए EPF योगदान को 3 महीने के लिए 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है. इसकी कुल रकम 6,750 करोड़ रुपये होगी.

नियमों में बदलाव:
>> MSME की परिभाषा में बदलाव किया करने का ऐलान किया गया है.

>> सरकारी प्रोक्योरमेंट के जरिए 200 करोड़ रुपये के ग्लोबल टेंडर पर पाबंदी लागने का ऐलान किया गया है.

कॉन्ट्रैक्टर्स को राहत:
>> RERA के अंतर्गत आने वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स (Real Estate Projects) के रजिस्ट्रेशन और पूरा करने की तिथि को बढ़ा दिया गया है.

>> टैक्स के मोर्चे पर भी कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इसमें नॉन-सैलरी क्लास के लिए TDS के भुगतान में 25 फीसदी तक की छूट दी जाएगी. जबकि, सैलरीड क्लास के लिए आयकर रिटर्न (Income Tax Return) भरने की अंतिम तारीख को नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है.

लिक्विडिटी के जरिए 1.7 लाख करोड़ रुपये
>> गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के​ लिए 30,000 करोड़ रुपये के लिक्विडिटी की सुविधा दी जाएगी.

>> DISCOM के लिए 90,000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी इनफ्युजन का ऐलान. वित्त मंत्री ने कहा कि इस सेक्टर को लंबे समय से बड़ी लिक्विडिटी की आवश्यकता की जरूरत थी.

>>  TDS और TCS में छूट के जरिए 50,000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी मिल सकेगी.

गारंटी के तौर पर 45 हजार करोड़ रुपये
>> केंद्र सरकार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी 2.0 के तहत 45 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान करेगी.