61 साल के इतिहास में पहली बार 60 दिन के लिए बंद हुई इंदिरा गांधी नहर, जानिए क्या है वजह

राजस्थान के कई जिलों में खेती और पेयजल के लिए लाइफलाइन मानी जाने वाली इंदिरा गांधी नहर अपने  61 साल के इतिहास में पहली बार 60 दिन  तक बंद की जा रही है. इंदिरा गांधी नहर का क्लोजर 30 मार्च से शुरू हो चुका है जो 28 मई तक चलेगा। लेकिन ऐसा नही है कि 28 मई के बाद ये नाहर फिर बंद नही होगी बल्कि लगातार 3 साल तक होगा यानी 60-70 दिन के तीन क्लोजर।
अब आप सोच रहे होंगे कि राजस्थान में इनती गर्मी पड़ती है और पानी की किल्लत पड़ जाती है इसके बावजूद लाइफलाइन कहीं जाने वाली इंदिरा गांधी नहर बंद क्यों की जा रही है.
दरअसल हरिके बैराज से राजस्थान के हिस्से में 15 हजार क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ा जाता है ताकि लोगों तक पानी पहुँच सकते लेकिन नहर क्षतिग्रस्त होने से रोज लगभग 4 हजार क्यूसेक पानी बर्बाद हो जाता है. इतना ही नहीं, नहर कमजोर और ठीक ना होने की वजह से हर बारिश के सीजन में राजस्थान के हिस्से का लगभग एक लाख क्यूसेक पानी सतलज नदी में छोड़ना पड़ता है, जो बहकर पाकिस्तान चला जाता है। यह इतना पानी है कि 10 जिलों की 100 दिनों की प्यास बुझा सकता है। इतना ही नही जब ये पानी सतलज नदी से होते हुए पाकिस्तान जाता है तो भारत पर आरोप लगाता रहा है कि बारिश के मौसम में जब पाकिस्तान में बढ़ जैसी स्थिति होती है तो भारत जानबूझकर सत्लब नदी में पानी छोड़ देता है.

अब 2023 की गर्मियों तक 310 किमी के दायरे में नहर और इसके फीडर की मरम्मत की जाएगी , जिसमें इस साल 90.87 किमी की मरम्मत होगी। इसमें पंजाब में 41, हरियाणा में 10.67, राजस्थान में 13.4 किमी और 25.8 किमी मुख्य नहर सुधारी जाएगी।

दरअसल तीन साल पहले केंद्र, पंजाब, राजस्थान सरकारों के स्तर पर बातचीत हुई इसके बाद 10 सीनियर IAS, 15 से ज्यादा चीफ इंजीनियर्स, 100 से ज्यादा फील्ड इंजीनियर्स, सेंट्रल वाटर कमीशन, भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP), जल शक्ति मंत्रालय दोनों ही राज्यों के जल संसाधन विभाग के टॉप अधिकारीयों की टीम ने पूरा खाका तैयार किया. जिसपर अब काम हो गया है.
दरअसल नहर से होने वाले पानी की बर्बादी रोकने के लिए केंद्र, राजस्थान व पंजाब सरकार में 23 जनवरी 2019 को करार हुआ था। 1976 करोड़ रु. से नहर की सेहत सुधारी जा रही है। केंद्र 982 करोड़, राजस्थान 715.47 करोड़ व पंजाब 279.26 करोड़ खर्च कर रहा है।
नहर बंद होने के कारण राजस्थान के बीकानेर, नागौर ,जोधपुर, जैसलमेर, चुरू ,गंगानगर,हनुमानगढ़ सीकर व झुंझुनूं जिले प्रभावित होगे यहाँ पर पानी की आस्थाई वयवस्था की गयी है.


IGNP और जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव नवीन महाजन ने कहा, ‘राजस्थान ने नहर की रिलाइनिंग (मरम्मत) की पहल की। केंद्र व पंजाब भी साथ आए। नहर की हालत यह थी कि एक-दो साल में इसका पूरा सिस्टम ध्वस्त होने का खतरा था। लेकिन मरम्मत से पश्चिमी राजस्थान की जन, जल और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और आने वाले 3-4 दशक तक हमारी जरूरत व हिस्से का पानी पूरा मिलता रहेगा।’