नाक में स्टिक डालने से छुटकारा, अब मात्र 60 रुपय में कोरोना टेस्ट!

कोरोना महामारी के बीच एक अच्छी खबर आई है. खबर ये है कि अब कोरोना जांच के लिए नेरो फैरिंजयल और ओरो फैरिंजयल यानी नाक या गले में स्टिक डाल स्वैब नहीं लिया जाएगा. बल्कि अब सलाइन गार्गल के जरिए टेस्ट कराया जा सकेगा. ये अच्छा इसलिए है क्योंकि ये काफी सस्ता होगा और कम समय लेगा.

अभी तक कोरोना वायरस का टेस्ट RT-PCR या रैपिड एंटिजेन टेस्ट के जरिए किया जा रहा था. लेकिन अब नागपुर स्थित नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट यानी NEERI ने एक नया विकल्प खोज निकाला है. NEERI द्वारा की गई इस खोज से अब थूक से ही कोरोना का टेस्ट हो जाएगा. अहम बात ये है कि NEERI की इस खोज को ICMR ने भी मान्यता दे दी है.

इसके वैज्ञानिकों ने स्वैब लेने का ऐसा तरीका खोज निकाला है जिससे आपको कोई तकलीफ नहीं होगी, बल्कि किसी भी प्रकार की बाहरी चीज को अपने शरीर में प्रवेश दिए बगैर आप कोरोना जांच के लिए अपना स्वैब दे सकते हैं.

कोरोना टेस्ट करने के इस नए तरीके से समय और खर्चे की भी बचत होगी.जहां RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट आने में 3 से 4 दिनों का समय लग जाता है. वही इससे कोरोना का टेस्ट कराने पर 3 घंटे में ही कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट मिल सकेगी. ऐसे समय में अगर मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया गया तो उसका इलाज शुरू होने में काफी देर नही होगा और सही समय पर इलाज शुरू हो जायेगा.

ये सलाइन गार्गल की तकनीक बहुत ही आसान है. इसमें जांच करने वाले को एक कंटेनर दिया जाएगा और महज कुछ सेकंड तक गार्गल करने के बाद इसी कंटेनर में उस गार्गल को एकत्र करना होगा और इसके बाद इसकी जांच प्रयोगशाला मे की जाएंगी.इस तकनीक से कोरोना जांच के लिए सैंपल एकत्र करने के लिए किसी प्रशिक्षक की जरूरत नहीं होगी. वही कोरोना जांच सेंटर पर ज्यादा भिड़ भी जमा नहीं होगा. कोई भी आसानी से इस कंटेनर में अपना स्वैब का सैंपल जमा कर सकता है.

People wanting COVID gargle test not following instructions: VCH - Squamish  Chief

इस तकनीक से जांच करने का खर्च भी मात्र 60 रुपये तक होगा तो वहीं अभी मौजूदा तकनीक RT-PCR के लिए 500 से अधिक रुपये खर्च किए जा रहे हैं. साथ ही इस तरीके से कोई तकलीफ भी नहीं होगीं और सबसे अहम बात ये है कि भारत में आने वाली कोरोना की तीसरी लहर जिसमें सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को बताया जा रहा है उनका भी स्वैब आसानी से बिना बच्चों को तकलीफ दिए लिया जा सकता है.