भारतीय कंपनी को कोरोना की दवा बनाने के लिए पहली कंपनीको मिली मंजूरी, शुरू होगा परीक्षण

कोरोना वायरस का इलाज आज पूरी दुनिया खोज रही है लेकिन अभी तक किसी भी देश को सफलता नही मिली है. ऐसे में भारत की कंपनी ने दावा किया है कि उसे सरकार से दवा बनाने और परीक्षण करने की आज्ञा मिल गयी है,

ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल (Glenmark Pharmaceuticals) को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए फैविपिराविर (Favipiravir) एंटीवायरस टैबलेट के क्लिनिकल ट्रायल की मंजूरी मिली है. ग्लेनमार्क फार्मा ने दावा किया कि डीसीजीआई से ऐसी मंजूरी पाने वाली वह देश की पहली कंपनी है. फैविपिराविर एक वायरल-रोधी दवा है. इंफ्लूएंजा वायरस के खिलाफ इस दवा ने सही प्रतिक्रिया दिखायी है. क्लिनिकल ट्रायल मिलने की खबर से गुरुवार को कारोबार के दौरान ग्लेनमार्क के शेयरों में 9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.

DCGI से ऐसी मंजूरी पाने वाली वह देश की पहली कंपनी
कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने इस दवा के लिए कच्चा माल (API) आंतरिक तौर पर तैयार किया है. इसका यौगिक (फॉर्मूलेशन) भी उसने ही विकसित किया है. कंपनी ने इसके मानवीय चिकित्सकीय परीक्षण की अनुमति मांगी थी. यह मंजूरी कोरोना वारयस से आंशिक तौर पर संक्रमित मरीजों पर परीक्षण के लिए मांगी गयी थी.

कंपनी ने कहा कि कोरोना वायरस के मरीजों पर दवा परीक्षण के लिए नियामकीय अनुमति पाने वाली वह देश की पहली कंपनी है. फैविपिराविर एक वायरल-रोधी दवा है. इंफ्लूएंजा वायरस के खिलाफ इस दवा ने सही प्रतिक्रिया दिखायी है. जापान में इंफ्लूएंजा वायरस के इलाज के लिए इस दवा के उपयोग की अनुमति है.

नियमों के अनुसार कंपनी आंशिक तौर पर कोरोना वायरस से संक्रमित चुनिंदा 150 मरीजों पर इसका परीक्षण करेगी. मरीज पर परीक्षण की अवधि 14 दिन से ज्यादा नहीं हो सकती. वहीं इसके पूरे अध्ययन की अवधि 28 दिन से ज्यादा नहीं हो सकती