हरियाणा में छाएगा पानी का संकट? भूजल पहुंचा रिकॉर्ड 81 मीटर नीचे

हरियाणा में पानी की कमी के चलते कई इलाकों में धान की खेती पर रोक लगा दी गयी है. इसके पीछे की वजह ये है कि इन क्षेत्रों में वाटर लेवल बेहद नीचे चला गया है क्योंकि यहाँ धरातल से पानी की निकासी बेहिसाब तौर पर हुई है… अब यही यहाँ के लोगों के लिए एक मुसीबत बन गया है.
वैसे तो पानी का महत्व तो सबको पता है जैसे जल ही जीवन है,  पीना के बिना हम जी नही सकते.. तमाम प्रकार के स्लोगन हमने बचपन में ही पढ़ा था लेकिन पानी को बचाने के लिए, बर्बादी को रोकने के लिए हम क्या कर रहे हैं.. इसका जवाब शायद किसी के पास ना हो…


हरियाणा में भू-जल स्तर (Ground water level) रिकॉर्ड 81 मीटर (265.748 फुट) से नीचे चला गया ‌है. पिछले एक दशक में लगभग दो गुना संकट बढ़ा है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुताबिक 10 साल पहले यहां का भू-जल 40 से 50 मीटर नीचे मिला करता था. हरियाणा में बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है और धान की खेती में पानी अधिक लगता है.. कहा जाता है कि एक किलो चालवा उगाने में 3 से 5 हजार लीटर पानी लगता है.

तो आप सोचिये हरियाणा में भूजल का कितना पानी त्युबल से निकला गया होगा… अब वाटर लेबल की स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने कई क्षेत्रों के किसानों को धान की फसल न उगाने का आदेश दिया है.. प्रभावित किसानों को सरकार 7000 रूपये एकड़ के हिसाब प्रोत्साहन राशि दे रही हैं लेकिन किसान विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये राशि बेहद कम है. आपको बता दें कि जल संकट (Water crisis) के लिहाज से डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में सरकार ने 1,00,000 हैक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल न बोने का फैसला लिया था. हजारों की संख्या में किसानों ने रजिस्ट्रेशन भी करवाया है क्योकि उनकों समझ आ गया है कि जल है तो कल है..

हरियाणा में भूजल रिचार्जिंग के लिए 1000 बोरवेलों का निर्माण करवाया जायेगा. बोरवेल बनाये जाने की योजना को रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक में सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा. एक बोरवेल पर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च आएगा जिसका 90 प्रतिशत खर्च सरकार करेगी और 10 फीसदी रकम किसान को देनी होगी. बोरवेल बनाने के बाद इसे किसानों को उपयोग के लिए सौंप दिया जाएगा.

प्रदेश के वो 8 ब्लॉक इसके लिए चयनित किए गए हैं जिनमें भूजल संकट ज्यादा है. इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा. इनमें धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है. इनमें किसानों को बागवानी अपनाने के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ देने का इंतजाम किया गया है. वैसे हरियाणा में ज्यादा जल संकट वाले 19 ब्लॉक हैं. लेकिन इनमें से 11 ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती.


महाराष्ट्र से लेकर चेन्नई और दिल्ली से लेकर हरियाणा तक पानी के लिए मचे हाहाकार ने बता दिया है कि हम अभी नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि किसान क्या करे?
ये तो रही हरियाणा की बात. क्या दूसरे राज्य भी ऐसा करेंगे? कृषि वैज्ञानिक साकेत कुशवाहा कहते हैं कि नीति आयोग ने धान और गन्ने की फसल पर ठीक चिंता जाहिर की है. जल संकट का सामना कर रहे और कृषि आधारित प्रदेशों को यह समझने की जरूरत है कि कैसे ज्यादा पानी वाली फसलें कम की जाएं और किसानों का घाटा भी न हो. धान की फसल पैदा करने में पश्चिम बंगाल पहले, यूपी दूसरे और आंध्र प्रदेश तीसरे नंबर पर है.

तो सोचिये पानी का संकट आने वाला नही बल्कि आ गया है.. हर साल देश के कई क्षेत्रों में सूखा पड़ता है… पीने के लिए पानी नही मिलता… गाँव छोड़कर लोग चले जाते हैं… जानवर प्यास से मर जाते हैं.. पेड़ पौधे और फसलें बर्बाद हो जाती है… तो दोस्तों पानी का बचाव कीजिये क्योंकि ये भी अटल सत्य है कि जल है तो कल है…