पीसी एक्ट की धारा जोड़ने के मामले में पांच जून को होगी सुनवाई

रांची: राज्यसभा चुनाव वर्ष 2016 में हुए हॉर्स ट्रेडिंग मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) जोड़ने को लेकर दायर आवेदन पर बुधवार को सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एपीपी जया टोप्पो ने मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक दंडाधिकारी अनुज कुमार की कोर्ट से समय की मांग की। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए अब हॉर्स ट्रेडिंग से जुड़े इस केस में पीसी एक्ट की धारा जुड़ेगी या नहीं इसपर पांच जून की तिथि निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि मामले में बीते मंगलवार को रांची पुलिस के जगन्नाथपुर थाना प्रभारी केस के (आईओ )अभय कुमार सिंह ने सिविल कोर्ट में (ड्राप बाक्स)आवेदन दिया था। धारा जुड़ने की अनुमति मिलने से तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता, तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के सलाहकार अजय कुमार की मुश्किले थोड़ी बढ़ सकती है।
मामले में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अनुसंधान के लिए रांची पुलिस को अनुमति दी थी। राज्य सरकार की अनुमति की कॉपी बीते 29 मई को रांची पुलिस को मिली थी। मामले को लेकर रांची पुलिस ने बीते 30 मई को पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के पीए दीपक का बयान दर्ज किया था। दीपक का बयान जगन्नाथपुर थाना में दर्ज हुआ था। उल्लेखनीय है कि 2016 के राज्य सभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक दल के पक्ष में खड़े उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने के लिए बड़कागांव के तत्कालीन विधायक निर्मला देवी को प्रलोभन दिया गया था। साथ ही उनके पति पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकी भी दिया गया था।
 सीआईडी एडीजी ने एसएसपी को दिया निर्देश
राज्यसभा चुनाव 2016 (हॉर्स ट्रेडिंग) मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के लिए अब पुलिस लैपटॉप का एफएसएल से जांच कराएगी। इस संबंध में एडीजी सीआईडी ने रांची के एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा को निर्देश दिया है। पुलिस के अनुसार एडीजी ने केस की समीक्षा के दौरान पाया था कि इस केस में दो मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हुआ है लेकिन केस के अनुसंधान में बयान लेने के दौरान अशोक कुमार और बैजनाथ कुमार ने संबंधित मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किए जाने की बात से इनकार किया था । अब एडीजी ने अनुसंधानकर्ता को इस बिंदु पर अनुसंधान का निर्देश दिया है कि अगर किसी गवाह द्वारा दोनों मोबाइल नंबर से कॉल किए जाने से संबंधित अगर कोई स्क्रीनशॉट या कोई अन्य दस्तावेज उपलब्ध होता है तब पुलिस संबंधित गवाह से इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज हासिल करने के लिए 65 बी (भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के तहत कार्रवाई करें।