12 विकासशील देशों की करीब 9 करोड़ आबादी को ख़तरा!

एक ऐसा बर्फ़ का पहाड़ यानी की ग्लेशियर जिसका आकार गुजरात के क्षेत्रफल के बराबर है..वो बहुत जेती से पिघल रहा है..जिसने वैज्ञानिकों के लिए चिंता पैदा कर दी है..ये ग्लेशियर अंटार्कटिका के पश्चिमी इलाके में स्थित है. इस ग्लेशियर का नाम थ्वायटेस (Thwaites) है..ये कोई मामूली ग्लेशियर नहीं बल्कि इसका आकार लगभग गुजरात के क्षेत्रफल के बराबर है..इतना ही नहीं यह समुद्र के अंदर कई किलोमीटर की गहराई तक डूबा हुआ है. लेकिन अब सबसे बड़ी चिंता का विषय ये है कि ये ग्लेशियर बड़ी तेजी से टूट कर पिघल रहा है..यदी ऐसा होता है तो पूरी दुनिया के सभी समुद्रों का जलस्तर अगले 50 सालों में 2 फीट और 70 सालों में करीब 5 फीट तक बढ़ जाएगा..जिस वजह से करोड़ों लोगों पर आफत आ सकती है.

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बता दे कि समुद्र के अंदर इस ग्लेशियर की चौड़ाई 468(अड़सठ) किलोमीटर है और इससे आइसबर्ग लगातार टूट रहे हैं..जिस तेजी के साथ यह पिघल रहा है..इसी वजह से ये कमजोर होकर टूट भी सकता है..और इसका असर खास तौर पर दुनिया के तटीय इलाकों पर पड़ सकता है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अगर यह इसी तरह जारी रहा तो मालदीव जैसे कई द्वीप पानी में डूब जाएंगे..विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 30 वर्षों में इसके पिघलने की रफ्तार लगभग दोगुनी हो गई है और अगर यह इसी तरह जारी रहा तो अगले 80 वर्षों में यानी की 2100 तक यह पूरी तरह पिघल सकता है, अगर ऐसा होता है तो 12 विकासशील देशों की करीब नौ करोड़ आबादी को रहने के लिए नई जगह तलाशनी होगी। इतने बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन दुनियाभर के देश बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। इसका असर कई देशों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा.

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इसकी गिनती जहां दुनिया के सबसे महत्‍वपूर्ण ग्‍लेशियर के तौर पर होती है, वहीं इसे बेहद जोखिमभरा भी माना जाता है और इसे लोग ‘डूम्‍स-डे’ ग्‍लेशियर भी कहते है..यानी वो ग्लेशियर जो कयामत वाले दिन पिघलेगा..लेकिन ग्‍लेशियर जिस गति से पिघल रहा है, उससे पहले ही दुनियाभर में समुद्र के जलस्‍तर में 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है..

इस ग्लेशियर का क्षेत्रफल 192,000(बानबे) वर्ग किलोमीटर है। यानी की गुजरात के क्षेत्रफल 196,024(छीयांबे) वर्ग किलोमीटर से थोड़ा छोटा..

इस ग्लेशियर के बारे में पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने इसके अंदर छेद किया है. इस छेद के जरिए एक रोबोट को इस ग्लेशियर के अंदर भेजा गया. इस प्रयोग से ही पता चला कि यह ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहा है. समुद्र के अंदर इस ग्लेशियर की बड़ी चट्टानें पिघलकर समुद्र में लगातार मिल रही हैं. जिसकी वजह से पूरी दुनिया के तटीय इलाकों को खतरा पैदा हो रहा है..