कोहरा से पानी कैसे बनाते हैं रेगिस्तानी देश? पढ़िए पूरी खबर

ठण्ड में कोहरा हमारे लिए किसी बड़ी समस्या से कम नही होता लेकिन उन लोगों के लिए वरदान होता है तो  रेगिस्तान  इलाकों में जीवन बिताने पर मजबूर है. इसके पीछे की वजह आप इस वीडियो में समझेंगे…

रेगिस्तानी देशों में पानी की समस्या सबसे अधिक होती है जैसे हमारे राजस्थान के कई इलाके पानी की समस्या से जूझते हैं. मोरक्को में तो कोहरे की बूंदो को इकठ्ठा करने के लिए खास तकनीक से बड़े-बड़े जाल बनाए जाते हैं। जो की जाल में कोहरे की बूंदों को जमा के बाद उससे पानी बनाया जाता है। इस तकनीक को फॉग कैचिंग कहा जाता हैं।

इतना ही नही फॉग कैचर पर बेलाविस्टा और पेरू बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं. बेलाविस्टा में नदी, झील या ग्लेशियर नहीं पाया जाता हैं लिहाजा इस देश को  पानी की कमी से जूझना पड़ता हैं। बेलाविस्टा में फॉग कैचर का काम साल 2006 से शुरू किया। इसलिए किया गया पानी की कमी से थोड़ी रहत मिल सके। इस तकनीक को सबसे पहले साल 1969 में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। 14 महीने की रिसर्च के बाद  कोहरे से रोज 11 लीटर पानी बनाने में सफलता मिलती थी। जानकारी के लिए बता दें कि कोहरे में एक क्यूबिक-मीटर में लगभग 0.5 ग्राम पानी होता है।

कनाडा की एक सामाजिक संस्था ने अब नई तकनीक तैयार की है जिसे क्लाउड-फिशर कहते हैं  और यहाँ से पानी अफ्रीकी देशों में उन लोगों तक पहुंचा रहा है, जो पानी की भीषण कमी से जूझ रहे हैं.

कोहरा किसे कहते हैं…
कोहरा हवा में मौजूद बहुत छोटे-छोटे जलबिंदुओं के समूह से मिलकर बनता है. ये मूलतः गैस होती है जो  भाप के पानी बनने की प्रक्रिया से गुजरती है. पानी के ये छोटे कण हवा में तैरते रहते हैं. आंखों के सामने हल्की सफेद चादर जैसी दिखाई देती है… इन्हें ही कोहरा कहा जाता है. कोहरा एक प्राकृतिक स्थिति है जो कई तरह की होती है, जैसे समुद्र की सतह पर होने वाला कोहरा जिसे सी-फॉग कहते हैं. कई बार कोहरा एकदम से घना होता है और फिर तुरंत ही गायब हो जाता है, इसे फ्लेश फॉग कहते हैं. ये फॉग हवा में नमी और तापमान की वजह से अचानक आकर चला जाता है.

पानी की कमी अब दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रही है और पिछले दो दशकों के दौरान हर शख्स के लिए मुहैया ताजा पानी की मात्रा 20 फीसद तक गिर गई है. ये बात संक्युक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट से सामने आई है.