लगातार चौथी बार इंदौर कैसे बना भारत का सबसे साफ शहर, यहां जाने इसके लिए क्या कदम उठाये गए

मध्य प्रदेश की व्यापारिक और व्यावसायिक नगरी इंदौर ने एक बार फिर से स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 में बाजी मार ली है. यह लगातार चौथा मौका है, जब इंदौर ने स्वच्छता के मामले में नंबर 1 का खिताब जीता है.इसके साथ ही इंदौर शहर लगातार चौथी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन गया है.

गौरतलब है कि 2016 में हुए सबसे पहले सर्वेक्षण में देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मैसूर को मिला था. उसके बाद से इंदौर साल 2017, 2018 और 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षणों में देश भर में शीर्ष स्थान पर रहा. अब लगातार ये चौथी बार है जब इंदौर स्वच्छता के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है. ऐसे में यहां ये सवाल उठना लाज़मी है कि इंदौर के लगातार चौथी बार इस सफलता के पीछे क्‍या कारण हैं…आखिरकार कैसे और कौन से कदम उठा कर इंदौर लगातार चार सालों से ये मुहाम हासिल करता आ रहा है..तो चलिए वो कौन से कदम है…

Swachh Survekshan: Indore gets cleanest city tag for 4th time in a ...

– इंदौर की स्‍वच्‍छता में कामयाबी की नींव में अहम योगदान कचरा प्रबंधन और प्रसंस्करण की अलग-अलग योजनाएं हैं.
– इंदौर में हर रोज तकरीबन 1,200 टन कचरे का सुरक्षित निपटारा करने की क्षमता विकसित की गई है. जिसमें से 550 टन गीला कचरा और 650 टन सूखा कचरा शामिल है.

– लगभग 8,500 सफाईकर्मी 3 शिफ्टों में काम करते है. सुबह 6 बजे से तड़के 4 बजे तक लगातार शहर को साफ रखने का काम चलता है.

– शहर से बड़ी कचरा पेटियां काफी पहले ही हटा दी गई हैं.

– Indore municipal corporation(आईएमसी) की 700 गाड़ियों से हर घर और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग जमा किया जाता है. दिन में दो बार ये गाड़ियों शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर कचरा जमा करने का काम करती है.

– इस्तेमाल किए गए डाइपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे जैव अपशिष्टों को कचरा संग्रहण गाड़ियों में अलग रखा जाता है ताकि इनका सुरक्षित निपटारा किया जा सके.

– शहर में कचरा प्रसंस्करण संयंत्र सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर लगाए गए हैं ताकि ये वित्तीय रूप से टिकाऊ बने रहें.

– इंदौर के करीब 35,000 घरों में गीले कचरे से खाद बनाने वाली इकाइयां लगी हैं. कचरे से खाद बनाने वाली इकाइयां होने से घरों से गीला कचरा बाहर निकलना कम हो रहा है.

– आईएमसी ने “थैला बैंकों” और “बर्तन बैंकों” की स्थापना के साथ ही घरों और होटल-रेस्तरांओं में बचे हुए भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए “फूड एटीएम” जैसे बेहतरीन कदम भी उठाए हैं.

– सीवेज के शोधित पानी का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा आईएमसी के 25 बगीचों में दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है.

– इंदौर में सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों के इस्तेमाल पर काफी पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है.

– नगर निगम ने शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया. झुग्गियों के लोगों के लिए सुलभ शौचालय और निगम की गाड़ियां लगाईं.जिसके बाद लोगों ने खुले में शौच करने की अपनी मानसिकता बदल ली.

-शहर में एक बहुत बड़े जन-जागरण अभियान की शुरुआत की गई जिसमें राजनैतिक नेतृत्व के साथ ही गणमान्य नागरिक शामिल हुए

-इंदौर देश का पहला ऐसा शहर था जिसने सड़क पर थूकने पर जुर्माना लगाया. इसके निगम की गाड़ियां लगातार गश्त पर रहती हैं

-ऐसा नहीं है कि इंदौर शहर में सिर्फ साफ-सफाई पर ही ध्यान दिया गया, बल्कि वेस्ट मैनेजमेंट का सही तरीके के इस्तेमाल से वित्तीय लाभ हासिल किया

इसी तरह से सफाई व्यवस्था को दूरुस्त करते हुए इंदौर चौथी बार देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अव्वल है.इसके साथ ही कड़ी मेहनत, जनता का सहयोग, सफाई में अच्छा काम करने पर पुरस्कार और नियम तोड़ने पर दंड मिलना….इनका इंदौर को सबसे साफ शहर बनाने में बहुत अहम योगदान रहा. लेकिन इन सबके साथ ही शहर की जनता ने इंदौर को स्वच्छ बनाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी.