कितनी बढ़ गयी माउंट एवरेस्ट की उंचाई? यहाँ पढ़िए चीन और नेपाल ने क्या कहा?

नेपाल में जब साल २०१५में भयंकर भूकम्प आया था तब से ये कहा जा रहा था की इसका असर दुनिया की सबसे बड़ी चोटी माउन्ट एवरेस्ट पर भी हुआ है और उसकी उंचाई कम हो गयी है लेकिन नई रिपोर्ट सामने आने के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि माउन्ट एवरेस्ट की उंचाई घटी नही बल्कि और बढ़ गयी है. नेपाल और चीन ने संयुक्त रूप से माउंट एवरेस्ट को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी बताते हुए इसकी ऊंचाई 8,848.86 मीटर बताया है. यह माउंट एवरेस्ट की पुरानी ऊंचाई से 86 सेंटीमीटर ज्यादा है.

आपको बता दें की माउंट एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा और तिब्बत में चोमोलोंगमा कहते हैं. यह इन दोनों ही देशों में फैला हुआ है लेकिन इसकी चोटी नेपाल की सीमा में स्थित है. २017 में माउंट एवरेस्टी की ऊंचाई मापने की शुरुआत नेपाल की ओर से शुरू की गई. 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद इसे फिर से मापने का फ़ैसला किया गया था क्योंकि ऐसा कहा गया था कि भूकंप का दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर असर पड़ा है. बाद में चीन ने भी इसकी नपाई शुरू की. नेपाल और चीन ने अपने आकडे शेयर किए.दोनों ही देशों ने इसकी आधिकारिक घोषणा की.

चीन ने इससे पहले 1975 और फिर 2005 में माउंट एवरेस्ट की उंचाई मापी थी. चीन ने एवरेस्ट की ऊंचाई तब 8,844.43 मीटर बताई थी. इसमें उसने स्नो कैप को शामिल नहीं किया था. इस बार के ऊंचाई में स्नो कैप शामिल किया गया है. नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने बताया कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई अब 8848.86 मीटर है, जो पहले के मुकाबले 86 सेमी (2.8 फीट) ज्यादा है। इससे पहले साल 1954 में भारत के सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर आंकी थी. वैसे एवरेस्ट की उंचाई को लेकर हमेशा विवाद होता ही रहता है… अलग अलग देश अलग अलग दावे करते हैं… हालाँकि चीन जब भी एवरेस्ट की उंचाई को मापता था तो वो बर्फ की चादर जो हिमालय पर हमेशा रहती है उसे नही शामिल करता था जिसकी वजह से चीन के आकड़ों में एवरेस्ट की उनचाई हमेशा कम ही रहती थी.. हालाँकि इस बार किये गये माप में चीन ने बर्फ की चादर की उंचाई को भी शामिल किया है.

हालाँकि एवरेस्ट की बढती उंचाई को लेकर वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि एवरेस्ट की ऊंचाई हर साल बढ़ रही है। उनका मानना है कि एवरेस्ट अरावली की पहाड़ियों की तुलना में काफी नई है। इसलिए ये स्थिर भी नहीं है और इसके नीचे की टेक्टोनिक प्लेटें घूम रही हैं। जिसकी वजह से इसकी ऊंचाई बदलाव होता रहता है।वैसे माउंट एवरेस्ट भी अब प्रदुषण से बच नही पाया…बहुत लोगों का सपना होता है की वे माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुँच सके…बहुत से लोगों ने अपना ये सपना पूरा भी कर लिया है. लेकिन यहाँ पहुचने वाले लोगों ने एवरेस्ट को भी प्रदूषित कर दिया है.