हंगरी से आया ये साइकिलिस्ट बिहार में आ फंसा, हो रहा है कैदियों जैसा व्यवहार!

लॉकडाउन के कारण बिहार के छपरा में लगभग 2 महीने से एक विदेशी शख्स विक्टर जीको फंसे हुए हैं. विक्टर हंगरी के रहने वाले है. जब लॉकडाउन लगा तो ये साईकिल से वाराणसी से दार्जिलिंग जा रहे थे. इसी दौरान ये छपरा में फंस गए और अभी तक फंसे हुए है. जबकि इनका कोरोना टेस्ट निगेटिव आया है. इस दौरान इनके साथ बहुत सारी घटनाएं हुई है. इन सब पर एक नजर डालेंगे लेकिन पहले आपको इनके बारे में विस्तार से बता देते है..

पूर्वी यूरोपीय देश हंगरी के निवासी विक्टर जीको एक धार्मिक पर्यटक हैं. जो साईकिल से ही यात्रा करते है. विक्टर 8 फरवरी को भारत आए थे. वो भारत आने के बाद पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार की यात्रा अपनी हाईटेक साइकिल से ही की. इस दौरान विक्टर अपने यात्रा की कुछ बातें बताते हुए कहते है कि जब मैं उत्तर प्रदेश के पास में किसी जगह पर अपना खाना बना रहा था तो स्थानीय लोगों ने मुझे घेर लिया. उनकी भाषा मुझे समझ नहीं आ रही थी, लेकिन वे सभी मेरा वीडियो बना रहे थे. मैंने उन्हें रोका भी, लेकिन वे लोग नहीं माने.

इसके बाद विक्टर बताते है कि लॉकडाउन के पहले सप्ताह तक साईकिल से यात्रा करने में कोई खास परेशानी नहीं आई. लेकिन 29 मार्च को जब वो छपरा के रिवीलगंज इलाके से गुजर रहे थे, तो प्रशासन ने आगे जाने से मना कर दिया. फिर उन्हें कोविड-19 की जांच कराने के लिए छपरा सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया. वो बताते है कि मेरी कोरोना की जांच भी की गई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई.लेकिन एहतियातन रखते हुए वो अस्पताल में ही 14 दिनों के लिए क्वारनटीन कर दिए गए.

लेकिन इस दौरान हैरानी की बात ये है कि क्वारनटीन के दौरान ही 10 अप्रैल को विक्टर का लैपटॉप, मोबाइल, स्विस नाइफ, कपड़े और नगद रुपये सब चोरी हो गया. हालांकि,चोरी की घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने चोरी का सारा सामान बरामद कर लिया लेकिन उनका पासपोर्ट नहीं मिला.

कोरोना लॉकडाउन: हंगरी का शख़्स बिहार ...

जब क्वारनटीन का समय खत्म हुआ तो विक्टर ने प्रशासन से अपने यात्रा पर आगे निकलने की इजाजत मांगी लेकिन उन्हें इजाजत नहीं मिली. सफर पर जाने के लिए लीगल तरीका नहीं मिल पाने पर 24 मई को विक्टर ने अपने सभी समान के साथ साईकिल से दार्जिलिंग भागने की कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहे.विक्टर को पुलिस ने दरभंगा में पकड़ लिया. अभी फिलहाल छपरा के 6 बेड वाले वार्ड में वो अकेले रह रहे है. वो अपने सफर पर जाने के लिए सरकार और प्रशासन सबसे गुहार लगा रहे है.

हालांकि, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को जब विक्टर के बारे में पता चला तो उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उनसे बातचीत की और हर प्रकार की सहायता देने का आश्वासन दिया.

लेकिन बीते दो महीनों से उनके साथ एक कैदी जैसा ही व्यवहार हो रहा है. एक तरफ ज्योति है जिन्होंने गुरुग्राम से बिहार का सफर साईकिल से तय किया तो उन्हें इतनी सराहना मिल रही है तो वहीं दूसरी तरफ विक्टर है जिन्हें 2 महीने से कोरोना नेगेटिव आने पर भी कैद कर के रखा गया है.वो साईकिल से अपना सफर तय करने के लिए हर प्रकार की कोशिश कर रहे है लेकिन वो इन कोशिशों में नाकाम ही हो रहे है..