डरावना वीडियो : अंटार्कटिका में टूटा विशाल हिमखंड, दिल्ली के भी बड़ा है आकार

26 फरवरी की सुबह अंटार्कटिक की सतह पर दरार आ गई जो अंत में तैरते हुए बर्फ की चट्टान से अलग हो गया, जिसके बाद ही इस विशाल आइसबर्ग का निर्माण हुआ. जनवरी महीने से ही हर रोज करीब 1 किमी की रफ्तार से सतह से अलग हो रहा था. अंटार्कटिका का 1,270 वर्ग किमी का एक आइसबर्ग अपनी सतह से खिसक गया है. ये आइसबर्ग आकार में अमेरिका के शहर लॉस एंजेलिस जितना बड़ा है. बर्फ की जमीन में दरार की ये तीसरी बड़ी घटना है जो पिछले दस वर्षों में सामने आई है.

इस हिमखंड का आकार मुंबई शहर के दोगुने से भी ज्यादा है. यह घटना नवंबर 2020 में आइस शेल्फ पर बनी एक बड़ी दरार के बाद घटी है. शुक्रवार की सुबह (26 फ़रवरी ) को यह आइस बर्ग पूरी तरह टूट कर अलग हो गया.यह कितना बड़ा है, इसका अंदाजा ऐसे लगाएं कि देश के दो सबसे बड़े शहरी क्षेत्रों दक्षिण व उत्तर दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी व एनडीएमसी) का आकार 1292 वर्ग किमी यानी इसके लगभग बराबर है.

बीएएस के निदेशक डेम जेन फ्रांसिस ने एक बयान में कहा, ” हमारी टीमें बरसों से ब्रंट आइस शेल्फ से एक हिमखंड के अलग होने को लेकर पूरी तरह तैयार थी. आने वाले हफ्तों या महीनों में, हिमखंड मूल हिस्से से दूर जा सकता है, या फिर यह चारों तरफ से ब्रंट आइसबर्ग के करीब रह सकता है.” राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय एजेंसी के अनुसार अब यह हिमखंड खुले पानी में तैर रहा है.

जानें खास बातें
1. ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) ने बताया कि टूटे हुए बर्फ की मोटाई करीब 150 मीटर है. नवंबर में इसमें दरार देखी गई थी। तभी से वैज्ञानिकों को आशंका थी कि यह कभी भी टूट सकती है। इस जगह पर अब गहरी खाई बन गई है.

2. कुछ दिन पहले इसका बनाया वीडियो जारी किया गया है. BAS के डायरेक्टर जेन फ्रांसिस ने बताया कि उनकी टीम कई सालों से इस पर नजर बनाए हुए थी. इसका डेटा एनालिसिस के लिए कैंब्रिज में भेजा जाता है.

3. सर्दियों के चलते इस समय BAS का हैली रिसर्च स्टेशन बंद है। यहां 12 लोगों की टीम रहती है। हालांकि ये सभी इसी महीने के शुरू में यहां से चले गए थे.

4. 1956 से ब्रंट आइस शेल्फ पर 6 हैली रिसर्च स्टेशन बने हैं. ठंड में यहां का टेम्परेचर माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है.

5. हालांकि BAS ने खतरे को देखते हुए 2016 में हैली रिसर्च स्टेशन को यहां से शिफ्ट कर दिया था.

6. बर्फ की शेल्फ हर साल लगभग 2 किलोमीटर समुद्र की ओर बहती है. इसके चलते कुछ हिस्से टूट जाते हैं.

7. हालांकि यह प्राकृतिक घटना है.  करीब 10 साल की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में बन रही इस दरार का पता लगा लिया था.