झारखंड में- प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले का कानून फेल

Ranchi:  आरटीई एक ऐसा कानून है, जिसके तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को एक निश्चित संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चों का एडमिशन लेना है. ‘अपना संगठन’ नामक संस्था ने सूचना अधिकार के विभाग से जो जानकारियां मांगी थीं, उससे ये तथ्य सामने आये हैं. इस संस्था के अल हसन ने विभाग से मिली सूचनाओं और आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि रांची जिले में सत्र 2019-20 में आरटीई के तहत कुल 1679 आवेदन मिले. इनमें से मात्र 188 छात्रों को ही एडमिशन मिला. जिले में आरटीई के तहत 713 सीटें में 525 सीटें खाली रह गयीं. कुल आवेदनों में 89 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट कर दिये गये. जबकि इस सत्र में निजी स्कूलों में खाली सीटों की संख्या लगभग 74 प्रतिशत रही.

दूसरे शहरों में एडमिशन दर अधिक

संस्था से जुड़ी स्वाति नारायण ने बताया कि दिल्ली-मुंबई जैसे राज्यों में आरटीई से मिलने वाले एडमिशन की संख्या काफी अधिक है, जबकि झारखंड में इसके आंकड़े जुटाने में छह-सात महीने लग जा रहे हैं. आरटीई के तहत आवेदन करने वाले परिवारों से बात करने से जानकारी मिलती है कि वे एडमिशन के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन किस स्तर से नाम रिजेक्ट हो जाते हैं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा कि इसमें कोई बड़े करप्शन की भी आशंका है. आशंका है कि आरटीई के तहत सुरक्षित सीटों को बेचा जा रहा है.

सरकार के पास सही-सही जानकारी नहीं

हसन ने बताया कि सरकार को इसकी सही जानकारी तक नही है कि राज्य में आरटीई के तहत कितने एडमिशन हुए है. कई ऐसे परिवार योग्य होते हुए भी निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन नहीं करा पा रहे हैं. रांची जिले में निजी स्कूलों की संख्या मात्र 59 बतायी गयी है, जबकि हकीकत में इससे कई गुणा ज्यादा प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं. जाहिर है, ऐसे कई स्कूल हैं जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं.