भारतीय सेना में शामिल होगा एमक्यू-9बी! जानें भारत के लिए कितना अहम है ये अमेरिकी हथियार

 भारत के दुश्मनों की नींद अब और हराम हो जाएगी। भारत अमेरिका से एमक्यू-9बी ड्रोन (MQ-9B Predator Drones) की खरीद करने जा रहा है। भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ अपनी निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए तीन बिलियन अमेरिकी डालर से भी अधिक की लागत के 30 MQ-9B प्रीडेटर आर्मड ड्रोन खरीदने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। लंबे वक्त तक हवा में रहने की क्षमता से लैस इस ड्रोन को तीनों सेनाओं के लिए खरीदने की योजना है। भारत के लिए यह डील काफी अहम इसलिए भी है क्योंकि इससे एलएसी और हिंद महासागर में निगरानी क्षमता बढ़ जाएगी। खास बात यह है कि अमेरिका ने इसी ड्रोन आतंकवादी सरगना अल-जवाहिरी को मौत के घाट उतारा था।

MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन की ताकत और खासियत?

 यह अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की निगरानी के लिए खास तकनीक से लैस है और 35 घंटे तक हवा में रह सकता है। यह खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने की ताकत रखता है। इसके साथ ही यह समुद्री सतर्कता और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स ने इसे  तैयार किया है और यह असैन्य हवाई क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में भी सक्षम है।

किसको कितने ड्रोन मिलेंगे?

भारतीय नौसेना ने इन ड्रोन की खरीद के लिए प्रस्ताव किया था और तीनों सेनाओं को 10-10 ड्रोन मिलने की संभावना है। अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स द्वारा निर्मित रिमोट- संचालित ड्रोन करीब 35 घंटे तक हवा में रहने में सक्षम हैं। इसे निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने सहित कई मकसदों के लिए तैनात किया जा सकता है।

भारत के लिए कितना अहम है ये अमेरिकी ड्रोन?

चीन के साथ लगती सीमा (LAC) और हिंद महासागर के पास सतर्कता बढ़ाने में एमक्यू-9बी ड्रोन (MQ-9B Predator Drones) काफी अहम साबित होगा। यह लंबे समय तक हवा में रहने और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की निगरानी के लिए विशेष तौर से डिजाइन किया गया है. भारतीय सशस्त्र बल पूर्वी लद्दाख (East Ladakh) में चीन (China) के साथ गतिरोध के बाद ऐसे हथियारों की खरीद पर ध्यान फोकस कर रहे हैं।