भारत से फिर कई देश मांग रहे हैं गेहूं, तुर्की ने बताया था ‘ख़राब’

रूस और यूक्रेन (Russia Ukraine) के बीच पिछले तीन महीने से ज्यादा वक्त से जारी जंग (Russia-Ukraine War) ने दुनिया भर में खाने का खाद्य संकट (Food Crisis) पैदा करना शुरू कर दिया है। रूस और यूक्रेन दोनों ही देश दुनिया में गेहू के सबसे बड़े निर्यातक है। युद्ध की वजह से इन दोनों देशो का गेहू निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस वजह से पूरी दुनिया पर खाद्य संकट गहरा गया है। भारत गेहू के १० बड़े निर्यातकों में से एक है। लेकिन भारत सरकार ने इस साल 13 मई से गेहूं के निर्यात पर पाबंदियां लगा दी थी।  सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों पर लगाम लगाकर रखने के लिए यह अहम कदम उठाया गया था। वही पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammad Row) विवाद के बाद भारत को मुस्लिम देशों खासकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) में विरोध का सामना करना पड़ा है। कई खाड़ी देशों से तो ऐसी भी खबरें आईं कि वहां भारतीय सामानों का बहिष्कार (Boycott Indian Goods) किया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच तुर्की (Turkey) के द्वारा भारतीय गेहूं को ‘ख़राब ‘ बताए जाने के बाद परिस्थितियां और भी ख़राब हो गयी। हालांकि इसके बाद भी ताजा ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crisis) से निपटने के लिए कई देश भारत से गेहूं की मांग कर रहे हैं. यह मांग ऐसे समय आ रही है, जब भारत सरकार ने कई अन्य देशों की तरह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए गेहूं व चीनी समेत खाने-पीने की चीजों के निर्यात पर पाबंदियां (Export Curbs on Wheat and Sugar) लगा दी है। 

संकट के बीच कई देश मांग रहे भारत से गेहूं

भारत सरकार ने इस साल 13 मई से गेहूं के निर्यात पर पाबंदियां लगा दी गई थी। सरकार ने पाबंदियों का ऐलान करते हुए कहा था कि इसके बाद भी पड़ोसी देशों समेत उन देशों को गेहूं के निर्यात की अनुमति बाद में दी जाएगी, जिन्हें इसकी बेहद जरूरत है। फूड मिनिस्ट्री (Food Ministry)ने अपने एक बयां में बताया की ‘हमें कई देशों से गेहूं के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं और अभी उनके ऊपर गौर किया जा रहा है.’  हलाकि अभी तक उन देशो के नाम नहीं बताये गए है जिन्होंने अब भारत से गेहू की मांग की है। 

बैन के बाद भी जरूरतमंद देशों को मिलेगा गेहूं

रूस और यूक्रेन के बीच महीनों से छिड़ी जंग (Russia-Ukraine War) ने दुनिया भर में खाने का संकट (Food Crisis) पैदा कर दिया है। लड़ाई के चलते उनका निर्यात बाधित हुआ है और कई देशों के सामने गेहूं की कमी (Wheat Shortage) की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश भारत ने अपने घरेलु मांग को पूरा करने के लिए निर्यात पर बैन लगा दिया था। इसने पहले से उपस्थित संकट को और गंभीर बना दिया। हालांकि भारत ने निर्यात पर रोक लगाते हुए कहा था कि वह पड़ोसी देशों और जरूरतमंद देशों को गेहूं का निर्यात करते रहेगा। भारत सरकार गेहूं की मांग कर रहे देशो की जरूरतों और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता का मूल्यांकन करके ही जरूरतमंद देशो को गेहू का निर्यात करेगी। 

बांग्लादेश को भेजा गया इतने लाख टन गेहूं 

बैन के बावजूद पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) को 1.5 लाख टन गेहूं का निर्यात किया गया है। चालू वित्त वर्ष में 14 जून तक भारत ने 29.70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इस अवधि में 2.59 लाख टन गेहूं के आटे का भी निर्यात किया गया है। बांग्लादेश अभी भारत से और गेहूं खरीदने की तैयारी में है. पड़ोसी देश गेहूं के मामले में पूरी तरह से आयात पर निर्भर है और पिछले साल उसने अपनी जरूरत का करीब आधा हिस्सा भारत से खरीदा था। 

विरोध के बावजूद भारतीय गेहू की मांग बढ़ी

भारत को गेहूं के सबसे बड़े खरीदार इंडोनेशिया (Indonesia) और बांग्लादेश (Bangladesh) समेत 5 देशों से गेहूं के लिए रिक्वेस्ट मिले हैं। गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद भारत को इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ओमान (Oman), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन (Yemen) से गेहूं के लिए अनुरोध मिले है। यह लिस्ट अभी और लम्बी होती जा रही है। 

भारतीय गेहूं 40 फीसदी है सस्ता

दरअसल, भारतीय गेहूं की कीमत दुनिया के दूसरे देशों के गेहूं के मुकाबले काफी सस्ता है. जानकारों का कहना है कि भारतीय गेहूं की मांग के पीछे एक बड़ा कारण इसकी कम कीमत भी है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, कीमतें बढ़ने के बाद भी भारतीय गेहूं अंतरराष्ट्रीय भाव की तुलना में 40 फीसदी सस्ते में उपलब्ध है.