वोस्तोक-2022 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेगा भारत

रूस ने जब से भारत के साथ सैन्य अभ्यास ‘वोस्तोक 2022’ की घोषणा की है, अमेरिका बिलबिलाया हुआ है। रूस के सुदूर पूर्व में अंतर्राष्ट्रीय सैन्य अभ्यास शुरू किया गया है, जिसमें भारत और चीन सहित देश हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय सेना के रूसी सेना के साथ सैन्य अभ्यास पर अमेरिका ने चिंता जताई है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वोस्तोक 2020 रणनीतिक अभ्यास का उद्घाटन समारोह बुधवार को रूस के प्रिमोस्र्की क्षेत्र में एक सैन्य रेंज में हुआ। इस सैन्य अभ्यास में  भारत, चीन और कुछ अन्य देशों के 50 हजार से ज्यादा सैनिकों के भाग लेने का कार्यक्रम है। इस सैन्य अभ्यास को लेकर अमेरिका ने चिंता व्यक्त की है। अब इस युद्धाभ्यास को लेकर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया सामने आई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जीन पियरे कहा है कि यूक्रेन के साथ अकारण एवं बर्बर युद्ध छेड़ने वाले रूस के साथ किसी भी अन्य देश का सैन्य अभ्यास करना उसके लिए चिंताजनक है।

एक से सात सितंबर तक चलेगा सैन्य अभ्यास

यह सैन्य अभ्यास एक से सात सितंबर तक चलेगा। यह अभ्यास जापान सागर के पूर्व में और कुछ अन्य स्थानों पर होगा। रूस हर साल इस तरह के अभ्यास आयोजित करता है, मेजबान के रूप में सैन्य जिला बदलता रहता है। इस साल, पूर्वी सैन्य जिले ने 13 विदेशी देशों का स्वागत किया। इन देशों ने सैनिकों या सैन्य पर्यवेक्षकों को भेजने के लिए रूस के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया।

इस दौरान आक्रमण और बचाव, दोनों तरह के संयुक्त अभ्यास होंगे। ये अभ्यास कुल सात स्थानों पर होंगे। इनमें से कुछ समुद्री क्षेत्र होंगे। इस अभ्यास में पांच हजार से ज्यादा किस्मों के हथियारों का इस्तेमाल होगा। इसमें 140 लड़ाकू विमान, 60 युद्धपोत, गनबोट और सहयोगी जहाज होंगे। विदेशी मेहमानों की सूची में अजरबैजान, अल्जीरिया, आर्मेनिया, बेलारूस, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, लाओस, मंगोलिया, निकारागुआ, सीरिया और ताजिकिस्तान शामिल हैं। उनमें से नौ ने अभ्यास के युद्धाभ्यास भाग में भाग लेने के लिए सैनिकों को भेजा।

भारत की ओर से नहीं की गई कोई टिप्पणी

रूस में वोस्तोक-2022 सैन्य अभ्यास में भारतीय सैनिकों की भागीदारी पर नयी दिल्ली में भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गयी। एक से सात सितंबर तक ईस्टर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के सात प्रशिक्षण मैदानों पर और ओखोतस्क सागर एवं जापान सागर के समुद्री और तटीय क्षेत्रों में ‘रक्षात्मक और आक्रामक अभियानों का अभ्यास’ किया जाएगा।

अमेरिका है चिंतित

अमेरिका इस अभ्यास को लेकर चिंतित है। लेकिन अभ्यास में भाग लेने वाले देशों का भागीदारी को लेकर अपना निर्णय होगा। वह उन्हें खुद लेना होगा। यह पूछे जाने पर कि सैन्य अभ्यास में भाग लेने वाले देशों के खिलाफ क्या अमेरिका कोई कार्रवाई कर सकता है, तो प्रेस सचिव ने कहा-वह इस मामले में कुछ भी नहीं बता सकती हैं।