पिछले २ दशक में पहले के मुकाबले 10 गुना तेजी से लग रही है भारत के जंगलो में आग, इन राज्यों में आग लगने का सबसे अधिक खतरा

जल वायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर के जंगलो में आग लगने की घटनाये तेजी से बढ़ती जा रही है , जो की पर्यावरण वैज्ञानिको के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रिसर्च संस्थान काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) की एक रिसर्च में पाया गया है की देश में पिछले २ दशको में जंगलो में आग लगने की घटनाये काफी तेजी से बढ़ रही है जो की चिंता की बात है। जहाँ एक तरफ देश में गर्मी लगातार बढ़ रही है वही देश के अलग अलग जिलों से जंगलो में आग लगने की खबर भी आ रही है। गर्मियों में जंगलो में आग लगने की समस्या बाद जाती है, ऐसे में यह रिपोर्ट चौकाने वाली है।

पिछले २ दशको में हुआ १० गुना इजाफा

 काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) द्वारा जारी करी गयी एक रिपोर्ट “मैनेजिंग फॉरेस्ट फायर इन चेंजिंग क्लाइमेट” में कहा गया है की “भारत के 30 फीसदी  से ज्यादा जिलों के जंगलो में भीषण आग लगने का खतरा मौजूद है। ” अध्ययन के मुताबिक पिछले २ दशक में भारत के जंगलो में आग लगने की घटनओं में १० गुना तेजी से इजाफा हुआ है। जंगलो में आग लगने की प्रवर्ति के साथ साथ आग लगने की महीनो में भी पिछले २ दशको में काफी इजाफा हुआ है।  पिछले १ महीने में ही उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में आग लगने की घटनाओ में काफी बढ़ोतरी हुई है। 

क्या है रिपोर्ट में

रिपोर्ट के मुताबिक जैसे जैसे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है वैसे वैसे जंगलो में आग लगने की समस्या बढ़ रही है। शुष्क मौसम वाले इलाको में आग लगने की समस्या काफी अधिक है।  अध्ययन के मुताबिक जल वायु में तेजी से हो रहे परिवर्तन के कारण जंगलो में आग लगने की समस्या बढ़ गयी है। सीईईडब्ल्यू के सीईओ डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा, ‘पिछले एक दशक में, पूरे देश में जंगल में आग लगने के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. इनमें से आग की कुछ घटनाओं का हमारे नाजुक पारिस्थितिक तंत्र (fragile ecosystems) और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ा है. हमें जंगल में लगने वाली आग से होने वाले नुकसान को घटाने के लिए अपने पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है.’ उन्‍होंने आगे कहा, ‘जंगल में लगने वाली आग को रोकने के लिए राज्य और जिला स्तर पर सरकारी अधिकारियों को वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के अधिकारियों और वनों पर आश्रित समुदायों की क्षमता को बढ़ाने को प्राथमिकता देनी चाहिए. जंगल में लगने वाली आग के लिए सबसे ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में, इसको नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपायों को अपनाने और ड्रोन का इस्तेमाल करने के बारे में प्रशिक्षण को बढ़ाना चाहिए, ताकि इससे होने वाले नुकसान और तबाही को सीमित किया जा सके.’

इन राज्यों में है सबसे जयादा जंगल

भारत काफी बड़ा देश है जहा स्थानीय प्रभाव के मौसम में काफी परिवर्तन होता है। लेकिन इस बार जिस तरह से पिछले महीने के शुरुआत से ही पंजाब, हरयाणा, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश , विदर्भ और हिमाचल प्रदेश में गर्मी बढ़ रही है वह चिंता का विषय है क्योकि सबसे जायदा जंगल इन्ही राज्यों में है।

७५ से ज्यादा जिले बने हॉटस्पॉट

सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले २ दशको में जंगलो में लगने वाली आग के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामले उन जिलों में दर्ज किये गए है जिन में लम्बे समय से या तो सूखा पड रहा है या फिर तेजी से जलवायु में परिवर्तन हो रहा है यानि की बाढ़ की जगह सूखा या फिर मौसम में विपरीत परिस्थिया उत्पन हो रही है। उधम सिंह नगर (उत्तराखंड ), कंधमाल (ओड़िसा ), पूर्वी गोदावरी (आंध्र प्रदेश ), श्योपुर (मध्य प्रदेश) कुछ ऐसे जिले है जहा जंगलो में आग लगने की घटनाये काफी तेजी से बाढ़ रही है। सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक असम , छत्तीसगढ़ , ओड़िसा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश,उत्तराखंड , तेलंगाना , पूर्वोत्तर रजो  के जंगलो में आग लगने की काफी अधिक सम्भावनाये है। रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम के जंगलो में पिछले २ दशको में आग लगने की घटनाये सबसे अधिक हुई है

सीईईडब्ल्यू ने सभी राज्यों और केंद्र सरकार को जंगलो में लगने वाली आग से अवगत करा दिया है और साथ ही आग्रह किया है की यदि जल्द ही जलवायु परिवर्तन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाये तो दुनिया के देशो की तरह जल रहे जंगलो की तरह ही भारत के जंगलो में भी आग लगने की घटनाये और बढ सकती है।