देश को मिला पहला आदिवासी राष्ट्रपति, 25 जुलाई को शपथ लेंगी द्रौपदी मुर्मू

देश को नया राष्ट्रपति मिल गया है।  एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने राष्ट्रपति चुनाव में शानदार और बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने विपक्षी प्रतिद्वंदी को करारी शिकस्त दी है।  उनका कार्यकाल अगले 5 सालों के लिए होगा। द्रौपदी मुर्मू को 5,77777 वोट मिले। वे इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने मुर्मू के घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी। देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल मुर्मू, झारखंड की पहली महिला गवर्नर भी रह चुकी हैं। उन्होंने 18 मई 2015 को पद संभाला था। दो बार विधायक रह चुकी द्रौपदी ने अपने करियर की शुरुआत टीचर के रूप में की। उन्होंने ओडिशा के सिंचाई विभाग में भी काम किया है। उन्हें बेस्ट विधायक के अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

देश के राष्ट्रपति के तौर पर वह भारत की तीनों सेनाओं (थल सेना, वायुसेना, नौसेना) का सुप्रीम कमांडर भी होंगी. वह देश की सरकार का भी सर्वोच्च नेता कहलाएंगी. सरकार की सभी विधायी शक्तियां उन्हीं में निहित होंगी. इतने महत्वपूर्ण पद पर होने के नाते द्रौपदी मुर्मू को बहुत सी सुविधाएं मिलती हैं।

ओडिशा से प्रथम राष्ट्रपति बनीं

अब वे राष्ट्रपति बननी वाली केवल दूसरी महिला हैं. उनसे पहले 2007 में प्रतिभा देवीसिंह पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं. इसके अलावा द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से भी प्रथम राष्ट्रपति बनी हैं। उनके राजनैतिक सफर की शुरूआत 1997 में हुई थी जब वे रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद बनी थीं. द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में बीडेपी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान मंत्री भी रही थीं. द्रौपदी मुर्मू साल 2000 और 2004 में ओडिशा के रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गई थीं।

आदिवासी परिवार में जन्म

द्रौपदी का जन्म ओडिशा के मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में 20 जून 1958 को हुआ था। द्रौपदी संथाल आदिवासी जातीय समूह से संबंध रखती हैं। उनके पिता का नाम बिरांची नारायण टुडू एक किसान थे। द्रौपदी के दो भाई हैं। भगत टुडू और सरैनी टुडू।

द्रौपदी की शादी श्यामाचरण मुर्मू से हुई। उनसे दो बेटे और दो बेटी हुई। साल 1984 में एक बेटी की मौत हो गई। द्रौपदी का बचपन बेहद अभावों और गरीबी में बीता था। लेकिन अपनी स्थिति को उन्होंने अपनी मेहनत के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने भुवनेश्वर के रमादेवी विमेंस कॉलेज से स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की। बेटी को पढ़ाने के लिए द्रौपदी मुर्मू शिक्षक बन गईं।

द्रौपदी मुर्मू को कितनी सैलरी और क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी

भारत के राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू को हर महीने करीब 5 लाख रुपये की सैलरी मिलेगी। राष्ट्रपति के पास छुट्टियां बिताने के लिए दो शानदार हॉलीडे रिट्रीट भी होते हैं. इनमें से एक हैदराबाद में राष्ट्रपति निलयम और दूसरा शिमला में रिट्रीट बिल्डिंग है। इसके अलावा उन्हें उन्हें जीवनभर के लिए फ्री मेडिकल, घर और इलाज की सुविधा भी मिलती है। भारत सरकार राष्ट्रपति के रहने, स्टाफ और मेहमानों के स्वागत के लिए 2.25 करोड़ रुपये हर साल खर्च करती है।

25 को शपथ ग्रहण, भाजपा कार्यालय में जश्न की तैयारी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई की मध्य रात्रि को खत्म हो रहा है। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा। मुर्मू की जीत के बाद भाजपा दिल्ली में विजय जुलूस निकालेगी। ऐसा पहली बार होगा, जब राष्ट्रपति की जीत के बाद जुलूस निकाला जाएगा। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा राजपथ तक इस जुलूस की अगुआई करेंगे और भाषण देंगे। जुलूस में मुर्मू शामिल नहीं होंगी।

आदिवासी समाज में ख़ुशी का माहौल

NDA उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत के बाद उनके ओडिशा स्थित पैतृक गांव और देश के बाकी हिस्सों में जश्न का माहौल है। लोग ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के जरिए जीत की खुशियां मना रहे हैं। ओडिशा के मयुरभंज जिले में रायरंगपुर कस्बे के मुर्मू के गांव और ससुराल में उनके चाहने वाले लड्‌डू बांटकर सेलिब्रेट कर रहे हैं। द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 वर्षों का अनुभव है और वे भाजपा की टीम की अहम आदिवासी नेता हैं।