International Tiger Day 2020: क्यों और कब से मनाया जा रहा है? इस जगह पर प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में पाए जाते है 14 बाघ

दुनिया भर में आज बाघ दिवस मनाया जा रहा है. बाघ के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है. साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा हुई थी.इस सम्मेलन में मौजूद विभिन्न देशों की सरकारों ने 2022 तक बाघों की आबादी को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया था. इस दिवस के जरिए बाघ के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है.

20वीं शताब्दी की शुरुआत से ही विशेषज्ञ दुनिया में घटती बाघों की संख्या से चिंतिंत हैं. इसलिए बाघों को वन्यजीवों की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है. जो चिंता की बात है. लेकिन इस बीच भारत में ‘सेव द टाइगर’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों की बदौलत बाघों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है.

भारत में बाघों की जनसंख्या में 2014 से 2019 के बीच बढ़ोतरी हुई है. 2014 में जहां बाघों की आबादी 1400 थी वहीं 2019 में बढ़कर 2 हजार 967 हो गई. भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में बाघों की सबसे ज्यादा संख्या 526 है. जबकि कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघों की संख्या है. उत्तराखंड के कॉर्बेट में सबसे ज्यादा 231 बाघों की गणना हुई है. यहां प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में 14 बाघ पाए गए हैं. यह जनसंख्या घनत्व दुनिया में सबसे अधिक बताया गया है. यहां 16 शावक भी पाए गए.

Tiger industry continues to profit

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में अभी केवल 3900 जंगली बाघ ही बचे हैं. इनमें से देश में 2967 बाघ हैं. ऐसे में दुनिया के बाघों की जनसंख्या का 70 फीसद भारत में रहते है.

इसको देखते हुए अब बाघों के संरक्षण को लेकर भारत दुनिया के दूसरे देशों की मदद करेगा. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने दुनियाभर में 13 ऐसे देशों की पहचान की है, जहां मौजूदा समय में बाघ पाए जाते हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में इनकी संख्या कम है. ऐसे में भारत इन देशों को बाघों के संरक्षण के लिए बेहतर तकनीक और योजना मुहैया कराएगा.