भारत की पहली नेजल वैक्सीन को DCGI ने दी मंजूरी, भारत बायोटेक ने किया है विकसित

कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत में एक और हथियार तैयार हो गया है। देश की पहली नेजल वैक्सीन यानि की नाक से डालने वाली दवा  को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) की मंजूरी मिल गई है। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक ने बनाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने कहा, यह ‘कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई को एक बड़ा बढ़ावा’ है। ये कोरोना के लिए भारत का पहला नाक का टीका होगा. मनसुख मंडाविया ने कहा कि नियामक ने 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के प्राथमिक टीकाकरण के लिए आपातकालीन स्थितियों में प्रतिबंधित उपयोग के लिए टीके को मंजूरी दी है।

नेजल वैक्सीन (नाक का टीका) क्या है?

इसमें वैक्सीन की खुराक नाक के माध्यम से दी जाती है, न कि मौखिक रूप से या हाथ के माध्यम से. यह वैक्सीन नाक के जरिए स्प्रै करके दी जाती है, मतलब वैक्सीन लेने वाले की बांह पर टीका नहीं लगाया जाता. इसकी दो खुराक दी जाती हैं। इस वैक्सीन का नाम BBV154 है और यह भारत की पहली नेजल वैक्सीन है।  भारत ने अभी तक 100 करोड़ कोविड टीकाकरण करके एक रिकॉर्ड कायम किया है।

पिछले महीने पूरा किया परीक्षण

भारत बायोटेक ने इंट्रानैसल वैक्सीन का तीसरा क्लीनिकल ट्रायल 15 अगस्त को पूरा कर लिया था.ट्रायल के दौरान वैक्सीन को पहली और दूसरी खुराक के तौर पर दिया गया। भारत बायोटेक ने नेजल वैक्सीन का 4 हजार वॉलिंटियर्स पर क्लीनिकल ट्रायल किया है. इनमें से किसी पर इसका कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है। बूस्टर डोज के तौर पर भी इसका परीक्षण किया गया। बूस्टर डोज उन्हीं लोगों को दी गई थी जिन्होंने कोविड की दोनों वैक्सीन लगवा ली थी।  कंपनी ने बताया की पुरे भारत में 14 अलग अलग जगह पर इस वैक्सीन का परीक्षण किया गया है।

कोरोना के खिलाफ भारत के जंग को मिलेगी मजबूती

स्वास्थ्य मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि नाक से दी जाने वाली कोरोना वैक्सीन के आने के बाद  भारत कोरोना महामारी से और बेहतर ढंग से मुकाबला कर पाएगा। इस कदम से महामारी के खिलाफ हमारी जंग को और मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भारत ने अपने विज्ञान, शोध व अनुसंधान (R&D) और मानव संसाधनों का इस्तेमाल किया। वैज्ञानिक एप्रोच व सबके प्रयास के साथ हम कोविड-19 को मात दे देंगे।’