जन्मदिन विशेष – आखिर जमशेद जी टाटा का ब्रिटिश में क्यों किया गया था अपमान! कैसे लिया था बदला

कारोबार की दुनिया में बहुत बड़ा नाम, आजाद भारत को उद्योग-कौशल देने वाले और ब्रिटेन में हुई बदसलूकी का बदला लेने के लिए मुंबई के taj होटल का निर्माण करवाने वाले जमशेदजी टाटा का आज जन्मदिन है.. जमशेदजी का जन्म 3 मार्च 1839 को मुंबई के नवसारी में एक पारसी परिवार में हुआ था.

जमशेद जी टाटा ने अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत अफीम के व्यापार से की थी. उस समय अफीम का कारोबार कानूनी था. ये साल 1850 के आस पास का दौर था जब जमशेदजी गुजरात के नवसारी में अपनी पढ़ाई कर रहे थे और उनके पिता नुसरवानजी टाटा बॉम्‍बे (Bombay) में कारोबार कर रहे थे. पिता ने अफीम के कारोबार में जबरदस्‍त मुनाफा कमाया था.. धीरे धीरे जमशेद जी पिता नौशेरवांजी के साथ मिलकर अफीम का कारोबार करने लगे.. कुछ वक्त बाद उन्होंने अपना खुद का कारोबार शुरू किया.. लेकिन ये कारोबार चल नही पाया..

इसके बाद वे ब्रिटेन की यात्रा पर गये जहाँ उन्हें  कॉटन मिल के बारे में देखा और भारत आये फिर साल 1874 में जमशेदजी टाटा ने वो काम कर डाला, जिसने भारतीयों का सीना चौड़ा कर दिया था। उन्होंने सेंट्रल इंडिया स्पिनिंग वीविगं एंड मैन्यूफैक्चरिंग नाम की एक कंपनी बनाई। यह किसी भारतीय द्वारा शुरू की गई पहली कंपनी थी, जिस के शेयरों का बम्बई स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार होता था।उन्होंने एलेक्जेंड्रा मिल नाम से कपड़ा मिल खोली. यहाँ उन्हें मुनाफ़ा मिला तो उन्‍होंने इसे भारी मुनाफे के साथ बेच दिया. इसके बाद मिल से मिले पैसों से 1874 में नागपुर में एक कॉटन मिल खोली. इसका नाम एम्प्रेस्स मिल कर दिया गया और ये कारोबार चलने लगा… अपनी सोच और कड़ी मेहनत से  जमशेदजी ने टाटा फैमिली को अफीम के कारोबार से निकालकर एक बड़े बिजनेस एम्‍पायर में बदला.

जमशेदजी टाटा यहीं नही रुके 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (Tisco) की स्थापना मौजूदा झारखण्ड के सिंहभूमि जिले में की.. इससे पहले यह साकची नामक एक आदिवासी गांव हुआ करता था। वहां की मिट्टी काली होने के कारण वहां का पहला रेलवे-स्टेशन कालीमाटी के नाम से बना। इसे बाद में बदलकर टाटानगर कर दिया गया। जमशेदपुर आज भारत के सबसे प्रगतिशील औद्योगिक नगरों में से एक है।

पूरे विश्व में अपनी भव्यता के लिए जाने जाना वाला और मुंबई की पहचान taj होटल का निर्माण भी जमशेद जी टाटा ने करवाया था.. इसके पीछे एक कहानी है और वो कहानी है जमशेदजी टाटा का अपमान!

दरअसल जमशेदजी टाटा ब्रिटेन घूमने गए तो वहां एक होटल में उन्हें सिर्फ इसलिए नही रुकने दिया गया क्योंकि वे एक  भारतीय थे.इसके बाद जमशेदजी ने ठान लिया कि वह ऐसे होटल बनाएंगे, जिनमें हिंदुस्तानी ही नहीं, पूरी दुनिया के लोग ठहरने की हसरत रखें. भारत लौटने के बाद उन्‍होंने होटल ताज की नींव रखवाई और 1903 में लगभग 4,21,00,000 रुपये के खर्च से यह भव्‍य इमारत बनकर खड़ी हो गई. होटल ताज देश का पहला होटल था जिसे दिन भर चलने वाले रेस्त्रां का लाइसेंस मिला था… इतना ही नही अपने अपमान को याद रखते हुए जमशेदजी टाटा ने ताज होटल के गेट में लिखवाया था कि यहां बिल्लियों और ब्रिटिश लोगों का आना मना है. हालाँकि इस बात का जिक्र कहीं कहीं ही मिलता है. वहीँ आज भी ये होटल पूरी दुनिया के लोगों के बीच लोकप्रिय है.

 

आज रतन टाटा अपने उद्योगों से भारत को एक नईऊंचाई पर ले जा रहे है..रतन टाटा अपने व्यक्तित्व और कारोबार के लिए भारतीय लोगों के दिलों में अपनी एक अलग ही पहचान बना चुके हैं.